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कनीजा  बेगम
प्रेरणा स्त्रोत: श्री अब्दुल समद (पति) सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: 5वीं पास पता: किशनगढ (अजमेर) आई.डी. नं.: 11455, 11523,11487 “मैं एक मध्यम श्रेणी परिवार की साधारण गृहणी थी, एक करोड़पति छोड़ लखपति होने का भी कभी सपने में भी नही सोचा था। मार्केटिंग कम्पनियों में लोगों को असफल होते हुए देख शुरू से ही मेरे इनके प्रति नेगेटिव भाव रहे। जब टुलिप प्लान मेरे सामने आया तो इसके साफ सुथरे प्लान और व्यक्क्तिगत व परिवार की सुरक्षा योजना से मैं काफी प्रभावित हुई और मैने टुलिप ज्वॉइन कर लिया। फिर एक लक्ष्य की भांति कठिन मेहनत कर मैने मात्र 22 महिनों के एक अल्प समय में स्टेप 14 पूरी कर प्रथम डायमण्डशिप प्राप्त की ली। मेरे इस प्रयास में मेरे पति मार्केटिंग गुरू श्री अब्दुल समद साहब का विशेष सहयोग रहा। इसके साथ ही मेरी हाल ही में प्रथम महिला डबल डायमण्डशिप भी हो गई है। मेरी पुत्री निलोफर परवींन की 120वीं डायमण्डशिप के साथ ही हमारा डायमंड से स्टेप 6 का लक्ष्य भी पूरा हो गया है।
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सेवाराम छणंग
सफर: परचूनी दुकान से शिक्षा: महज साक्षर पता: कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11599, 12106 “मैं किशनगढ के पास स्थित छोटे से गांव कुचील में एक छोटी से परचूनी की दुकान चलाया करता था। सच बताऊँ खुली आंखो को छोड़ कभी सपने में भी करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बनने की बात नहीं सोची। जब टुलिप का प्लान मेरे सामने आया तो यकायक तो मुझे विष्वास नहीं हुआ कि एक बार के अल्प निवेश से इंष्योरेंस सुविधा और एक करोड़ रूपये कमाने का मौका मिल सकता हैं। क्यों कि टुलिप से पहले और बाद कई मल्टीलेवल कम्पनियां आई अगर इन कंपनियों से किसी को भी आर्थिक रूप से सक्षम होते मैंने कभी नहीं देखा और ना ही कभी सुना। इ बीच टुलिप के माध्यम से मैंने लोगों के पास पैसा आते देखा तो मुझे इस सच्चाई पर यकिन करना पड़ा। फिर मैंने टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन करके ढाई साल में एक करोड़पति डिस्ट्री. का खिताब पाया हैं। साथ ही एक आईडी मैंने मेरे बड़े भाई श्री हरचंद जी छणंग के ना मसे भी लगाई जिस पर मैंने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है।”
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मुकेश शर्मा
सफर: पैट्रोल पम्प पैट्रोल भरने से शिक्षा: 7 वीं पास पता: आदित्य मिल कॉलानी, किशनगढ आई.डी. नं.: 16213, 16228 “पैसा सब कुछ तो नहीं होता परन्तु पैसा बहुत कुछ होता है। इस बात को मैंने काफी करीबी से महसूस किया है। आर्थिक तंगी से में कई बार टूटा मगर मैने कभी हिम्मत नहीं हारी। हमेशा कुछ करने की मन चाह लिये प्रयासरत रहा। पैट्रोल पम्प पर पैट्रोल भरते हुए मैंने यह तो ठान लिया कि मुझे करना जरूर है। टुलिप से पहले कुछ मल्टीलेवल मार्केटिंग भी की मगर अनके प्लान सही नहीं होने से उसमें काफी प्रयास के बाद भी असफलता ही हाथ लगी। जब टुलिप का प्लान मेरे सामने आया तो मुझे इसमें सच्चाई नजर आई। लगभग 22 माह में मैंने टुलिप की डायमण्डशिप प्राप्त कर हाल ही में डबल डायमण्डशिप भी प्राप्त कर ली हैं। आज मेरे खुद के पास एक टाटा सफारी गाडी व शानदार बंगला है। अब मेरे परिवार को एक बेहतर जिंदगी दे सकता हूँ।
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हरजीराम चोधरी
हरजीराम चोधरी नंदरामी घंसवा (पत्नि) सफर: टी स्टाल व खान मजदूर से शिक्षा: 5 वीं पास पता: मु. कल्याणीपुरा, (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11653,12187 “मैंने पत्थरों की चुनाई का कार्य किया, किशनगढ में टी-स्टॉल चलाई, फिर खान पर मजदूरी करने कटनी (एमपी) चला गया। महीने भर काम करके करीब 4-5 हजार रूपये कमा पाता था। इससे हमेशा आर्थिक संकट का साया छाया रहता था। परन्तु मैं भगवान को उस पल के लिए धन्यवाद देता हूँ जब उसने टुलिप से जुडने के प्रस्ताव पर मुझसे ना की जगह हाँ कहलवा दी। और एक हाँ मेरे लिए वरदान साबित हुई। टुलिप मे मुझे सुनहरा भविश्य नजर आया और मैं निकल पड़ा इस मिशन को पूरा करने के लिए। फिर कभी पीछे मुडकर के नहीं देखा। और करीब 29 महिने मेंएक करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर का यानि डायमंड का खिताब प्राप्त कर आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर ली। इसके साथ ही हाल में मेरी पत्नि नंदरामी घंसवा के नाम से लगी आई में भी डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। यानि हम कपल डायमंड बन गये है। अब भगवान की कृपा से पैसों को लेकर मुझे किसी ओर देखने की जरूरत नही है यानि टुलिप बिजनेस में मैंने बी.ए. पास कर ली है।
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हीरालाल छणंग
हीरालाल छणंग सफर: ट्रैक्टर चलाते हुए शिक्षा: कक्षा 4 वीं पास पता: कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 12081, 12456 ’मैं किशनगढ में मार्बल एरिया में ट्रैक्टर चलाया करता था और पूरे दिन काम करने के बाद महिने के कुल 7-8 हजार रूपये कमा पाता था। इस दरमियां टुलिप प्लान मेरे सामने आया। मुझे बताया गया क इस प्लान से करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बना जा सकता है तो मुझे यकीन नही हुआ। परन्तु जब प्लान को मैने ठीक तरह से समझा तो मुझे विष्वास हुआ। फिर मैंने भी अपने भाईयों की सहायता से टुलिप बिजनेस को करना शुरू किया। शुरूआती दौर में जब मैने अपने मिलने वालों को टुलिप का प्लान बताया तो लोगों ने मेरी बसत का विष्वास नहीं किया। फिर टुलिप से लोगों को सफल होते मेरे प्रयास भी रंग लाने लगे और धीरे-धीरे लोगों को समूह मेरे साथ इस बिजनेस में आता गया। टुलिप से जुड़कर लगभग 30 महिने में मैं एक बार करोडपति डिस्ट्रीब्यूटर बना हूं। साथ ही अभी हाल ही में मैंने डबल डायमंड का खिताब भी हासिल कर लिया है।
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विनोद सैनी
विनोद सैनी सफर: फोटो स्टूडियो से शिक्षा: बी.ए. फाइनल पता: 200 फीट बाईपास, जयपुर “लोगों की सेवा करने के भाव से मैने टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन किया। इससे पहले मैं जयपुर में एक फोटो स्टूडियों की दुकान किया करता था। एक बार एक दुर्घटना में मेरे एक पांव में फैक्चर हो गया था। तब मुझे एक व्यक्ति ने टूलिप डिस्ट्रीब्यूटर को सहायतार्थ मिलने वाले दुर्घटना बीमा संबंधी फायदे के बारे में बताया। मैंने जब टुलिप का प्लान देखा तो मैं काफी प्रभावित हुआ। बीमा संबंधी फायदा अधिक से अधिक लोगों को दिलाने के उद्देष्य से मैंने टुलिप ज्वॉइन किया। फिर मैने कई व्यक्क्तियों टुलिप से जोड़कर टुलिप से मिलने वाली सुविधाएं व आर्थिक सम्पन्नता दिलाई। धीरे धीरे टुलिप से जुडने वालों का कारवां बढता गया। इस तरह मैने हजारों लोगों को असीमित रोजगार दिलाया। साथ ही टुलिप बिजनेस की इस यात्रा के दौरान मुझे मेरा जीवन साथी भी मिला हैं, जा मेरे लिए बहुत खुशी की बात हैं। टुलिप प्लान के तहत मैंने पहले डाउनलेग से डायमंड बनने में मदद की, फिर मैने स्वयं ने डायमण्डशिप ली। डाउनलेग से 101 डायमंड बनाने का जो लक्ष्य मैने बनाया था वो हाल ही में मैने पूरा कर लिया है। इसमें मेरी स्टार टीम का विशेष सहयोग रहा है।”
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हनुमान छणंग
हनुमान छणंग सफर: निजी जीप ड्राइवर से शिक्षा: 8वीं पास पता: छणंगो की ढाणी, कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11517, 12312 “टुलिप से पहले मैं अपनी स्वयं की जीव सवारियों में चलाया करता था। सवारियां बैठाना और उनकों गंतव्य स्थान पर छोड़ना एक सीमित सी जिंदगी थी। अब्दुल समद साहब जब टुलिप का प्लान लेकर मेरे पास आये तो उनका सम्मान रखते हुए मैंने उनकां ज्वाँनिंग के पैसे दे दिये। साथ ही कुछ लोगों को मिलाने की कहा तो उनको मैंने अपने साथियों से भी मिला दिया। कुछ ही दिनो में वो वापस आये और उनको मुझे इंष्योरेंस पॉलिसी और चैक लाकर दिया। इस पर मैंने कहा पॉलिसी तो ठीक है मगर ये चैक किस बात का है। तब उन्होने कहा कि कुछ लोगों से तुमने मिलाया था ना ये इस का कमीशन है। तब मैंने कहां कि लोगों को तो मैं और भी मिला सकता हूँ। और इस तरह धीरे-धीरे कारवां बढता गया और आज मैं आपके सामने हूँ। महज चार से पांच हजार रूपये माहवार की आय से एक साधारण जिंदगी से मेरे विष्वास मरे सोच और टुलिप के बेहतर प्लान से आज मैं डबल डायमंड हूँ।”
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दिनेश कुमावत
दिनेश कुमावत (लक्ष्मीदेवीं कुमावत, पत्नि) सफर: डेयरी बूथ संचालन से शिक्षा: कक्षा 10 वीं पास पता: मित्र निवास किशनगढ आई.डी. नं.: 16218, 16223 “मैं किशनगढ के राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल के पास एक साधारण सी डेयरी बूथ का संचालन करता था। सुबह बूथ को खोलना और रात को घर चले जाना। इस प्रकार एक सामान्य सा जीवन व्यतीत कर रहा था। कभी किसी दिन में सिंगल नहीं कपल डायमंड बनूंगा, ये तो कभी सपने में भी नहीं सोचा। आज मेरे परिवार को पैसों को लेकर किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। अब कोई चीप खरीदने या खाने से पहले रेट पूछने की जरूरत नहीं होती। यह सब कुछ ट्रेडिशनल बिजनेस में कतई संभव नहीं था।
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हनुमान छणंग
हनुमान छणंग सफर: निजी जीप ड्राइवर से शिक्षा: 8वीं पास पता: छणंगो की ढाणी, कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11517, 12312 “टुलिप से पहले मैं अपनी स्वयं की जीव सवारियों में चलाया करता था। सवारियां बैठाना और उनकों गंतव्य स्थान पर छोड़ना एक सीमित सी जिंदगी थी। अब्दुल समद साहब जब टुलिप का प्लान लेकर मेरे पास आये तो उनका सम्मान रखते हुए मैंने उनकां ज्वाँनिंग के पैसे दे दिये। साथ ही कुछ लोगों को मिलाने की कहा तो उनको मैंने अपने साथियों से भी मिला दिया। कुछ ही दिनो में वो वापस आये और उनको मुझे इंष्योरेंस पॉलिसी और चैक लाकर दिया। इस पर मैंने कहा पॉलिसी तो ठीक है मगर ये चैक किस बात का है। तब उन्होने कहा कि कुछ लोगों से तुमने मिलाया था ना ये इस का कमीशन है। तब मैंने कहां कि लोगों को तो मैं और भी मिला सकता हूँ। और इस तरह धीरे-धीरे कारवां बढता गया और आज मैं आपके सामने हूँ। महज चार से पांच हजार रूपये माहवार की आय से एक साधारण जिंदगी से मेरे विष्वास मरे सोच और टुलिप के बेहतर प्लान से आज मैं डबल डायमंड हूँ।”
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बंशीलाल मालाकार
बंशीलाल मालाकार सफर: मार्बल में ठेकेदारी कार्य से शिक्षा: 8वीं पास पता: मालियों की बाड़ी, किशनगढ आई.डी. नं.: 12310 मैंने किशनगढ के मार्बल एरिया में कटिंग व पॉलिश मशीन पर ठेकेदारी का कार्य किया। रोज कुंआ खोदना ओर रोज पानी पीने के समान काम करना पड़ता था। इस दौरान टुलिप का प्रस्ताव मेरे सामने आया। प्लान में मुझे विष्वसनियता नजर आयी तो मैंने इसे ज्वाईन कर लिया। जब इस बिजनेस से मेरे पास पैसे आने लगो तो फिर मैंने ठेकेदारी कार्य को छोड़ दिया और फुल टाईम इसमें काम करने लग गया। और अल्पावधि में ही मैंने टुलिप में डायमण्डशिप का खिताब हासिल कर लिया।
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रामस्वरूप कविया
रामस्वरूप कविया सफर: मजदूरी कार्य से शिक्षा: 8 वीं पास पता: बकरवालिया (किशनगढ) आई.डी. नं.: 12165 मध्यप्रदेश में मार्बल की माइंस में काम कर एक साधारण मजदूर सा जीवन जी रहा था। सर्दी, गर्मी और बरसात में माइंस में 12 घंटे की कठोर मजदूरी के बाद प्रतिमाह ढाई हजार रूपये ही मिल पाते थे। ऐसे में परिवार का भरण पोषण करना भी मुष्किल हो गया था। इस दौरान टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन किया। और लगभग ढाई साल में स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली तथा शीघ्र ही डबल डायमण्डशिप भी हो जायेगी।
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श्रीमती पाकिजा मंसूरी
शरीफ अहमद मंसूरी आईडी: श्रीमती पाकिजा मंसूरी सफर: साधारण गृहणी शिक्षा: 8 वीं पास पता: मु.पो. रामसर (अजमेर) आई.डी. नं.: 21996 आर्थिक कमजोरी के चलते जीवन के दौर में कई बार कठिनाईयां आई। पति श्री शरीफ अहमद मंसूरी के नौकरी में होने के बाद भी बमुष्किल से मकान बनाया। वेतन का 75 प्रतिशत हिस्सा लोन में चला जाता। नौकरी से मिलने वाली तनख्वाह से जैसे हमारे सपने दबे से गये थे। ऐसे में आर्थिक तंगी के बीच श्री अब्दुल समद साहब के मार्गदशन से टुलिप में ज्वाइनिंग ली। लगातार प्रयास, लगन व जनसेवा के मुख्य ध्येय के साथ मैन अल्प समय में स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरी सफलता को साकार रूप देने से मेरे पति शरीफ अहमद मंसूरी प्रेरणा स्त्रोत बने। समूह भावना से काम करने के मकसद से कार्य के बीच मेरी एक अन्य आईडी भी डायमण्डशिप की ओर अग्रसर है।
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रमेश चन्द जागिड
रमेश चन्द जागिड सफर: प्राइवेट स्कूल संचालन से शिक्षा: एम.ए., बी.एड पता: मु.पो. कुचीली, किशनगढ आई.डी. नं.: 11602 विकलांगता के भार के बीच 5 साल की उम्र में ही पिता का साया उठ जाने के बाद एक बार तो मेरा जीवन ही थम गया था। समझदार होने के साथ प्राईवेट स्कूल का संचालन करते हुए परिवार की जिम्मेदारी उठाने का प्रयास किया। इस बीच टूलिप के सम्पर्क में आया लेकिन ज्वाईनिंग के लिए रूपये की व्यवस्था के लिए मुझे अपनी मां की कंठी गिरवीं रखनी पड़ी लेकिन मां के सहयोग के बीच में यह दांव भी लगा बैठा। मां की कंठी वापस लाने व आर्थिक सक्षमता पाने की लगन के बीच मैने टुलिप में कार्य किया। यहां पर मेरी की दुआओं के साथ मैने इस स्टेप तो पैदल चलकर ही पूर्ण कर ली। अब मैने स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है।
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रफीक मो. पठान
रफीक मो. पठान सफर: टी वीं रिपेयरिंग से शिक्षा: 12वीं पास पता: किशनगढ (अजमेर) आई.डी. नं.: 11456 मैं किशनगढ मे रामनेर रोड़ पर टी.वीं. रिपेयरिंग का कार्य करता था। टुलिप से पूर्व मैं अन्य कम्पनियों से जुडे असफल लोगों को देखकर मैं नेटवर्क कम्पनियों से नफरत करता था। इस विषय में बात करना तक मैं पसंद नही करता था। टुलिप बिजनेस में आईडी तो पहले ही लगी हुई थी परन्तु सक्रिय रूप से कार्य नहीं किया। मगर टुलिप बिजनेस में लोगों की सफलता के शिखर पर चढते देख मैने भी टुलिप बिजनेस को सुचारू रूप से करना शुरू कर दिया। मेरा मानना है कि टुलिप में अगर किसी की जबरदस्ती से भी आईडी लगा दी तो एक समय के बाद मेरी तरह लगाने वाले व्यक्ति को धन्यवाद जरूर कहेगा।
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अनिल कुमार वैष्णव
अनिल कुमार वैष्णव सफर: फैक्ट्री व मेकेनिक लाईन से शिक्षा: 10 वीं पास पता: खजूरी, त. जहाजपुर (भीलवाडा) आई.डी. नं.: 21650 मैंने अपनी जिंदगी की शरूआत फैक्ट्री और मैकेनिक लाईन से की थी मगर इस साल के अथक प्रयासों के बाद भी मे अपनी एक मोटर साईकल तक नहीं खरीद पाया। टुलिप डायमण्डशिप के बार अब मेरे पास शान की सवारी टाटा सवारी गाड़ी व एक अच्छा मकान भी है। दोस्तों ऊपरवाला हर इंसान को एक खाली पन्ना देकर भेजता है। इंसान हौसलों से अपनी तकदीर उस पर खुद लिख सकता है। अगर हौसले बुलंद है कि तो उसकी सफलता का श्रेय उसकी सोच को जाता है।
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दिलीप सिंह राजपुरोहित
दिलीप सिंह राजपुरोहित (कंचन कंवर राजपुरोहित) सफर: मार्बल में प्राईवेट नौकरी शिक्षा: 8वीं. फैल पता: रत्ना कालोनी, मदनगंज एवं बिदियाद आई.डी. नं.: 11657, 11562 “मेरे सपने बचपन से ही बडे थे परन्तु पढने में रूचि कम होने से मैं कक्षा 8 वीं पास नहीं कर सका। मजबूरन मुझे किशनगढ के मार्बल एरिया में मार्बल गेगंसा मशीन पर बतौर ऑपरेटर नौकरी करनी पड़ी। नौकरी से मिलने वाली छोटी सी तनख्वाह से मंहगाई के दस दौर को देखते हुए जीवन में निराशा सी छाने लगी। इस दरमियां सुनहरे भविष्य को देखते हुए टुलिप बिजनेस जुड़ गया। मैने ईमानदारी व निष्ठा से कुछ महिने कठोर मेहनत की और आज मैं आपके सामने एक डायमंड के रूप में हूँ। इसके साथ ही मैंने टुलिप में अपनी पत्नि कंचन कंवर की आई डी भी लगा दी जिस पर भी डायमंडशिप प्राप्त हो गई। इस प्रकार पूरे भारत में पहले कपल डायमण्डशिप का खिताब मैंने हासिल किया है। अब मेरे परिवार व बच्चों को लेकर मुझे आर्थिक रूप से किसी प्रकार की केाई परेशानी नहीं रह गई है।
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रमेशपुरी गोस्वामी
रमेशपुरी गोस्वामी सफर: निजी विद्यालय का संचालन शिक्षा: बी.ए. पता: मु. शंकर श्योपुरा, त. दूदू (जयपुर) आई.डी. नं.: 17552, 17557 “मैं एक निजी विद्यालय का संचालन करते हुए साधारण सी जिन्दगी गुजार रहा था। इस दौरान मेरे पास एक परिचित के माध्यम से टुलिप प्लान आया। नेटवर्किग की अन्य कम्पनियों को असफलताओं को देखते हुए मुझे भी टुलिप नहीं करनी थी सो उनको टालता रहा परन्तु वो मुझे बार-बार टच करते रहे। आखिर में मैंने टालने के लिए ज्वाईनिंग राशि देकर पिण्ड छुड़ाना चाहा। परन्तु पैसे देने के बाद एक बार पुनः मेरी प्लान देखने की इच्छा हुई। मगर विष्वास फिर भी नहीं हुआ। फिर भी मैंने उनके कहने और यह चैक करने के लिए कि वास्तव में पैसा आता भी है या नही इसलिए मैने काम किया। मैने मात्र 13 दिनों में स्टेप 6 पूरी कर लगभग 27 हजार रूपये कमा लिये। फिर क्या था तेज धूप, आंधी तूफान, चाहे बारिश ही क्यों न रही हो मैंने अपना हौसला कभी नहीं खोया और निरन्तर सफलता की ओर अग्रसर रहा। और इसी का परिणाम है कि आज मैं आपके सामने डायमंड नहीं डबल डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ। सच, अगर मैं अवसर को समझ नहीं पाता तो एक साधारण सा मास्टर बनकर ही रह जाता।
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प्रेमलता कुमावत
ओम प्रकाश गुप्ता आईडी: प्रेमलता कुमावत (पत्नि) सफर: टेलरिंग कार्य से शिक्षा: 5वीं पास पता: रूपनगढ (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11656 सिलाई कार्य व अन्य निजी कम्पनी में कार्य करने के बाद भी आर्थिक सम्पन्नता नहीं मिल पाई। कर्ज के बीच दबा होने ओर 3-4 हजार रूपये की प्रतिमाह आय परिवार की जरूरतों के मुताबिक काफी कम थी। ऐसे समय में मैं उज्ज्वल भविष्य की चाह लिये टुलिप बिजनेस से जुडा। जिसमें अल्प समय के भीतर ही मैने अपनी पत्नि प्रेमलता कुमावत व भाभी गौरी देवीं के नाम से जो आईडी लगाई थी दोनों आईडी डायमण्डशिप हो गई है। पहले मोटर साईकिल में पेट्रोल भरने के पैसे भी नहीं होते थे आज भगवान के आशिर्वाद व टुलिप से मिली आर्थिक सम्बल से खुद तवेरा गाड़ी मेन्टेन कर रहा हूँ।
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मधु सुराणा
मधु सुराणा प्रेरणा स्त्रोत: उदयप्रकाश सुराणा (पति) सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: कक्षा 10 पता: खजूरी, त. जहाजपुर(भीलवाड़ा) आई.डी. नं.: 22653 एक साधारण गृहणी एक साधारण सा जीवन, एक सीमित सी आय बस यही सब कुछ था हमारी जिन्दगी में। मेरे पति ने बीमा अभिकर्ता के रूप में कार्य करते हुए और व कुछ अलग करने की चाह मन में लिए हुए थे। ऐसे में श्री मुकेश शर्मा ने टुलिप का प्लान बताया। टुलिप में शानदार के आय के साथ ही जबरदस्त मान सम्मान व सेवाभाव को देखते हुए हमने टुलिप ज्वाईन कर ली। श्री अब्दुल समद, श्री दिनेश कुमावत सहित पूरी टीम के सहयोग से कम समय में ही हमने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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विजय टॉक
विजय टॉक सफर: प्राइवेट नौकरी से शिक्षा: कक्षा 12वीं पास पता: हीरापुरा, अजमेर रोड़ जयपुर आई.डी. नं.: 11006, 11208 प्राईवेट कोचिंग पर नौकरी करते हुए 2500 से 3000/- प्रतिमाह कमा पाता था। जो कि वर्तमान दौर में ना के बराबर लगते थे। पढते समय बहुत बडे-बडे सपने देखे लेकिन हकीकत का धरातल कुछ और ही निकला। आर्थिक समस्या के कारण इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाया। बीच में कुछ नेटवर्क मार्केटिंग भी की, लेकिन हाथी के दांत खाने के ओर दिखाने के आरे वाली कहावत साबित हुई। इसी बीच परमपिता परमेष्वर ने श्री पी.सी.जैन साहब को टुलिप रूपी फूल देकर अवतरित किया और मुझे यह प्लान देखने को मौका मिला और निर्णय लेकर काम किया। लगातार व कड़ी मेहनत के चलते मैंने डाउनलाइन के रूप में मिले सितारों के रूप में राहुल जी खण्डेलवाल, एस.एन. सोनीजी, एम.एल.नागर, बी.एल. पटवा, एल.एल. कच्छावा, मन्नालालजी, धमेन्द्र टांक, कमलेश शर्मा, राजकुमार, मुकेश विजय, सत्यप्रकाश वर्मा, भगवान सहाय कुमावत, मो. वकील कादरी, भंवरलाल नाई, रमेशजी टांक, मनोज जी टांक, कुलदीपजी, उज्ज्वल सिंहजी व समस्त डिस्ट्रीब्यूटर्स का ऐसा अतुलनीय सहयोग मिला कि मैं एक साथ दो आईडी पर डायमण्डशिप हासिल करक डबल डायमंड का खिताब पाया। मेरी इस बिजनेस में 25 आईडी लगी हुई है जिसके लिए मैं प्रयासरत हूँ। मेरी परमपिता परमेष्वर से यही कामना है कि मेरी डाउनलेग का प्रत्येक सदस्य कम से कम समय में डायमंड बनकर ऐतिहासिक माहौल कायम करें।
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कल्याणमल जाट
कल्याणमल जाट सफर: खेती से शिक्षा: 8 वीं पास पता: बाडी, त. मसूदा (अजमेर) आई.डी. नं.: 41428 मैं एक किसान था और खेती बाड़ी करके अपने परिवार का गुजर बसर करता था। मगर भीषण अकाल के चलते खेती से होने वाली आय से परिवार पर हमेशा आर्थिक संकट छाया रहता था। ऐसे में मेरे पास टुलिप बिजनेस का प्लान आया। टुलिप में मुझे भविष्य की राह नजर आई। मुझे एक सुदृढ दिशा मिल गई। इसमें मैने लगन व मेहनत से कुछ महिने काम किया। जिसका परिणाम मैं आपके सामने एक डायमंड के रूप में हूँ। मेरे प्रयास मे श्री बाबूलाल अजमेरा व श्री नारायण गैना सहित मेरी अप लाइन व डाउन लाइन का विशेष सहयोग मिला।
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सुमन सैनी
सुमन सैनी सफर: घरेलू कार्य से शिक्षा: बी.ए. पता: कचील किशनगढ आई.डी. नं.: 12632, 13953 “मैं किशनगढ के पस स्थित एक छोटे से गांव कुचील की रहने वाली हूँ। मैने बी.ए. तक शिक्षा ग्रहण की है। और उसके बाद घर का कार्य ही करती थी। मेरा परिवार आर्थिक रूप से असक्षम था। ऐसे समय में श्री हनुमानजी छणंग के द्वारा टुलिप प्लान मेरे सामने आया। उनकी कही बातों पर मैने विष्वास किया और टुलिप को ज्वाइन कर लिया। टुलिप से मिलने वाली बेहतरीन आय और बीमा सुरक्षा से मैं काफी प्रभावित हुई। फिर मैंने इस परियोजना से अन्प्य लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया। और धीरे-धीरे कारवा बढता गया। मैने अल्प समय में डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरी इस डायमण्डशिप में प्रथम डबल डायमंड श्री हनुमान छणंग का मुझे विशेष सहयोग मिला। मेर प्रयास है कि मेरी डाउनलेग टीम से भी ज्यादा से ज्यादा डायमंड बने इसके लिए मैं निरन्तर प्रयत्नशील हूँ। सच टुलिप ने मुझे सपनों से भी ज्यादा दिया है। टुलिप का प्लान एक आप व खास सभी लोगों के डिजाईन किया हुआ है। टीम के विशेष सहयोग के चलते मेरी डबल डायमण्डशिप भी हो गई है। यानि मैने करीब 1 करोड़ रूपये तो प्राप्त कर लिये है साथ ही पूर्व में 1 लाख की रोयल्टी तो मिल ही रही थी। अब रायल्टी डबल डायमण्डशिप पर 2 लाख रूपये हो जायेगी। साथ ही पेयर इनकम की आय वो अलग से है।
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सत्यनारायण वैष्णव
स्व. रेखा वैष्णव (नोमिनी डायमंड: सत्यनारायण वैष्णव, पति) सफर: निजी स्कूल संचालन से शिक्षा: बी.ए. पता: कुसुम विहार कॉलोनी मदनगंज आई.डी. नं.: 16229 बी.ए पास करने के बाद मैने एक निजी विद्यालय खोला। मैं नेटवर्किग कंपनियों से भी जुड़ा मगर वहां हाथी के दांत दिखोन के कुछ और खाने के कुछ और साबित हुए। इस दौरान टुलिप का प्लान मेरे पास आया। मैने अपनी पत्नि रेखा वैष्णव के नाम से आईडी लगाकर टुलिप बिजनेस ज्वाईन कर लिया। लगातार प्रयासों से आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ।
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विजय टॉक
विजय टॉक सफर: प्राइवेट नौकरी से शिक्षा: कक्षा 12वीं पास पता: हीरापुरा, अजमेर रोड़ जयपुर आई.डी. नं.: 11006, 11208 प्राईवेट कोचिंग पर नौकरी करते हुए 2500 से 3000/- प्रतिमाह कमा पाता था। जो कि वर्तमान दौर में ना के बराबर लगते थे। पढते समय बहुत बडे-बडे सपने देखे लेकिन हकीकत का धरातल कुछ और ही निकला। आर्थिक समस्या के कारण इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाया। बीच में कुछ नेटवर्क मार्केटिंग भी की, लेकिन हाथी के दांत खाने के ओर दिखाने के आरे वाली कहावत साबित हुई। इसी बीच परमपिता परमेष्वर ने श्री पी.सी.जैन साहब को टुलिप रूपी फूल देकर अवतरित किया और मुझे यह प्लान देखने को मौका मिला और निर्णय लेकर काम किया। लगातार व कड़ी मेहनत के चलते मैंने डाउनलाइन के रूप में मिले सितारों के रूप में राहुल जी खण्डेलवाल, एस.एन. सोनीजी, एम.एल.नागर, बी.एल. पटवा, एल.एल. कच्छावा, मन्नालालजी, धमेन्द्र टांक, कमलेश शर्मा, राजकुमार, मुकेश विजय, सत्यप्रकाश वर्मा, भगवान सहाय कुमावत, मो. वकील कादरी, भंवरलाल नाई, रमेशजी टांक, मनोज जी टांक, कुलदीपजी, उज्ज्वल सिंहजी व समस्त डिस्ट्रीब्यूटर्स का ऐसा अतुलनीय सहयोग मिला कि मैं एक साथ दो आईडी पर डायमण्डशिप हासिल करक डबल डायमंड का खिताब पाया। मेरी इस बिजनेस में 25 आईडी लगी हुई है जिसके लिए मैं प्रयासरत हूँ। मेरी परमपिता परमेष्वर से यही कामना है कि मेरी डाउनलेग का प्रत्येक सदस्य कम से कम समय में डायमंड बनकर ऐतिहासिक माहौल कायम करें।
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गोमाराम डूक्या
गोमाराम डूक्या सफर: मार्बल गोदाम से शिक्षा: बी.ए. फाइनल पता: मु.पो. त्योद, त. किशनगढ आई.डी. नं.: 12460, 12459 उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी आज समय से कोई अच्छी नौकरी मिलना दुष्वार है। इसलिए मैने किशनगढ के मार्बल एरिया में मार्बल के गौदाम से अपना भाग्य आजमाया। लेकिन मुझे यहां पर आशातीत परिणाम नहीं मिले। मैं कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे आर्थिक रूप से अच्छी पकड़ तो हो ही साथ ही मान-सम्मान और प्रसिद्धि भी मिले। परन्तु व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा और किसी भी अन्य कार्यो के लिए लाखों रूपये की आवष्यकता के चलते मैं कुछ सोच नही पाया। इस दौरान टुलिप बिजनेस का प्लान मेरे सामने आया। मुझे लगा कि यही वो बिजनेस है जो मुझे चाहिए सब कुछ है। फिर मैंने अपनी सारी शक्तियां विचारों की, समय की, शरीर की, साधन की, टुलिप रूपि लक्ष्य में लगा दी। और इस दरमियां आने वाली हर चुनौती का मैंने डटकर सामना किया। और आगे बढता गया। जिसका परिणाम यह रहा है कि आज मैं डायमंड नहीं वरन डबल डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ। यह मैने पूरे भारत में दूसरी डबल डायमण्डशिप प्राप्त की है।
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पप्पू सिंह राठौड़
पप्पू सिंह राठौड़ सरमेश कंवर (पत्नि) सफर: प्राईवेट नौकरी से शिक्षा: 9वीं पास पता: किषोर नगर, मण्डा, राजसमन्द आई.डी. नं.: 39547, 40725 पढाई छोडने के बाद 10 साल मार्बल माईन्स में मशीन औपरेटर के पर कार्य करते हुए कभी मैं करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बन जाऊंगा सपने में भी नही सोचा था। एक दिन बंषीलाल जी मालाकार व बडे भाई भंवर सिंह जी राठौड़ मेरे पास आये व मुझे टुलिप के बारे में बताया कि इसमें इंष्योरेन्स भी होगा व पैसा भी कमा सकते हैं। शुरूआती दौर में मुझे इनकी बातों पर विष्वास नहीं हुआ। परन्तु जब लोगों को इसमे सफल होते देखा तो मुझे इस प्लान पर विष्वास हुआ कि वास्तव में इसमे आर्थिक स्वतंत्रता जा सकती है। फिर मैने बंषीलालजी व भाईसाहब के सहयोग से लगातार मेहनत करते हुए लगभग 27 महिने में डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। जिन्दगी भर माईन्स पर नौकरी करने से जितना पैसा मैं नहीं कमा पाता उतना पैसा मैने कुछ महिनों में ही मेहनत से कमा लिये। इसके साथ ही जो मान-सम्मान और जबरदस्त जनसम्पर्क बना वो अलग है।
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हरिशकर मेघवंशी
हरिशकर मेघवंशी सफर: पढाई शिक्षा: एम.ए. पता: ए-233, पंचशील, माकड़वाली रोड़, अजमेर आई.डी. नं.: 16595 मैं एक मिडिल परिवार से ताल्लुक रखता हूँ। जहां पैसों की कमी हर वक्त छायी रहती थी। पढाई पूरी करनके बाद कुछ ऐसा करने की सोच थी कि जिससे परिवार में पैसों को लेकर कोई कमी ना रहे। ऐसे में टुलिप प्लान मेरे सामने आया। टुलिप में वन टाईम अल्प निवेश के बाद 1 करोड़ रूपये का प्लान देखा तो मैने तुरन्त ज्वाइनिंग कर ली। जिसमें कुछ सालों से लगन व मेहनत से काम करने के बाद मैने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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मोती सिंह सिसोदिया
विजय सिंह सिसोदिया मोती सिंह सिसोदिया सफर: प्राईवेट स्कूल से शिक्षा: बी.ए. पता: बडू, परबतसर (नागौर) आई.डी. नं.: 21629, 21628 दोस्तों, टुलिप से पूर्व मैं (विजयसिंह सिसोदिया) प्राईवेट स्कूल का संचालन करता था। इस दरमियां दिलीपसिंह जी राजपुरोहित ने मुझे टुलिप बिजनेस का प्लान बताया। परन्तु मैं हमेशा ही नेटवर्किग कम्पनियों से नेगेटिव ही रहा इसलिए टुलिप बिजनिस के प्रस्ताव को भी टालता रहा। परन्तु दिलीप जी के बार-बार कहने व प्रेशन डालने पर मैने टुलिप में अपने भाई मोतीसिंह जी सिसोदिया व मेरे नाम से आईडी लगा दी। परन्तु जब मैने देखा कि टुलिप बिजनेस से लोगों को आर्थिक संबल मिल रहा है। तो फिर मैंने भी टुलिप बिजनेस को पूर्ण तरीके से समझकर विधिवत रूप से करना शुरू कर दिया। फिर कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। मैंने सबसे पहले आपने बडे भाई साहब मोतीसिंह जी के नाम से लगी आईडी पर डायमण्डशिप प्राप्त की और अभी हाल ही में मैने अपने नाम से लगी पर भी डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरे भाईसाहब जा रजाई गद्दे का काम करते थे कभी टुलिप ऑफिस तक भी नही गये। वे पहली बार मेरी डायमडशिप का चैक लेने जयपुर ऑफिस गये। अब मेरा प्रयास है कि मेरी टीम के स्टार लीडर्स भी शीघ्र ही डायमंड प्राप्त करें और इसके लिए मैं प्रयासरत हूँ।
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मनोज कमार मीणा
मनोज कमार मीणा श्रीमती मथुरदेवीं मीणा प्रेरणा स्रोत: श्री गोपाल मीणा सफल: पढाई करते हुए शिक्षा: कक्षा 12 पास पता: मु. वासलक्ष्मणा (देवली) आई.डी. नं.: 34604 सरकारी नौकरी मिलना दुष्वार होते देख पढने के दौरान ही मैने अपने लिए एक नई राह पर चलने का निर्णय कर लिया था। जिसमें अपार दौलत के साथ-साथ समाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान मिले। हमारा परिवार आर्थिक रूप से बहुत पिछड़ा हुआ था। इस दौरान टुलिप प्लान मेरे पास आया। मुझे टुलिप से वो सब कुछ नजर आया जो मुझे चाहिये था। सो मैंने टुलिप बिजनेस को ज्वाईन कर लिया। और आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। अभी हाल ही में मेरी माताजी श्रीमती मथुरादेव मीणा की भी डायमण्डशिप हो गई है।
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महावींर राव़
महावींर राव़ सफर: मार्बल व्यवसायी शिक्षा: 9वीं पास पता: 162, साई निवास, इन्द्रा नगर, किशनगढ आई.डी. नं.: 38402, 40385 मै टुलिप से पूवॆ मार्बल हैण्डीक्राफ्ट का काम किया करता था। जिसमें काफी मेहनत के बाद मुष्किल से माह के 8-10 हजार रूपये ही कमा पाता था। जिससे परिवार पर हमेशा आर्थिक तंगी का असर नजर आता था। ऐसे समय में टुलिप प्लान मेरा पास आया। परन्तु नेटवर्किग बिजनेस से लोगों की असफलता होते ही ज्यादा देखा। इसलिए शुरूआती दौर में मैं नेगेटिव रहा। मैं इसमें रूचि नही ली। पर जब टुलिप से अप लाइन से लेकर डाउन लेग तक सभी के पास पैसा आता देखा तो मैं अपने आप को भी टुलिप करने से नहीं रोक पाया। टुलिप में शानदार आय के साथ ही ढेर सारा सम्मान, सुरक्षा व सेवा कार्य से मैं बहुत प्रभावित हुआ। मेरी डायमण्डशिप होने से मेरे व मेरे परिवार की खुशियों का कोई ठिकाना ही नहीं है। मैं मेरे अप लाईन लीडर्स व डाउन टीम का ह्दय से अभारी हूँ। मेरी डाउन टीम से भी डायमंड बने मैं इसके लिए लगातार प्रयासरत हूँ।
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सुवाराम रावत
सुवाराम रावत सफर: ट्रक ड्राईवर से शिक्षा: कक्षा 8वीं. पास पता: ग्राम बासड़ा पोस्ट कुचील जिला अजमेर आई.डी. नं.: 12820 टुलिप से पूर्व में एक ट्रक ड्राइवर था। ट्रक ड्राइवर का जीवन किसी से छिपा नहीं है। सप्ताह भर महिना भर घर से बाहर सड़कों पर जिंदगी गुजारनी पडती थी। घर होते हुए भी रात होटलों व ढाबों में काटनी पड़ती थी। ऐसे में टुलिप बिजनेस प्लान मेरे सामने आया, मैं इसमे मिलने वाली बीमा सुविधाओं को देखकर ज्वॉइन हो गया। करीब 3-4 साल के निरन्तर प्रयासों से मैने डाममंडशिप प्राप्त कर ली।
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ओमपुरी गोस्वामी
ओमपुरी गोस्वामी संतरा देवीं गोस्वामी (पत्नि) सफर: लैथ मशीन मिस्त्री शिक्षा: कक्षा 9 वीं पास पता: मु.पो.ठठना, मीठड़ी (नागौर) आई.डी. नं.: 21941, 38973 कक्षा 9 पास करने के बाद मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होन के कारण आटा चक्की मशीन फैक्ट्री में लैथ मशीन मिस्त्री के रूप में काम करना पड़ा। एक बार जब रमेशपुरी जी गोस्वामी मेरे पास टुलिप का प्रोग्राम लेकर आये तो मै इनपे गुस्सा हुआ कि ये क्या लेकर आ जाते है। रमेशजी ने मुझे जोडने का बार-बार प्रयास किया। एक बार जब रमेशजी आये तो मेरे गांव के एक फौजी साहब ने कहा देखो ये क्या प्रोग्राम है। तो उन्होने इसमें विष्वास जताते हुए 10 फार्म भर दिये। तो मुझे लगा कि अगर इन्होने इस फार्म के पैसे दिये है तो अपने को भी 1 फार्म के पैसे देने में क्या दिक्कत है। परन्तु फिर भी मैंने इसमें रूचि लेकर काम नहीं किया। एक बार मेरे हाथ में फैक्चर हो गया था। तो रमेशजी ने मेरा इलाज में होने वाले करीब 5 हजार रूपये मुझे टुलिप के मार्फत इंषोरेन्स कम्पनी से दिलवा दिये। उसके बाद मैने गभ्भीरता से टुलिप का काम करना शुरू कर दिया। आज में आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। साथ ही मेरी पत्नि संतरा देवीं के नाम से लगी आईडी भी डायमण्डशिप हो गई है। यादि हम कपल डायमंड बन गये है।
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वेद प्रकाश चोटिया
वेद प्रकाश चोटिया सफर: प्राईवेट नौकरी से शिक्षा: बी.ए. फाईनल पता: मु.पो. बडू, त. परबतसर (नागौर) आई.डी. नं.: 22065 दोस्तों, कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलने की वजह से मुझे आर्थिक जरूरतों के लिए प्राईवेट नौकरी करनी पड़ी। हर आदमी की तरह मेरा भी सपना था कि मेरे पास भी एक गाडी हो, अच्छा सा बंगला हो, बैंक बैलेन्स हो, देश-विदेश घुमने का मौका मिले। मगर मेरी तनख्वाह से यह केवल सपने ही बनकर रहे गये थे। ऐसे समय में टुलिप बिजनेस का प्लान मेरे सामने आया। काफी सोचने समझने के बाद के बाद मुझे लगा कि यह बिजनेस मेरी तकदीर बदल सकता है। फिर क्या था मैने डायमण्डशिप को लक्ष्य बनाते हुए निरन्तरता और गहरी लगन से इस बिजनेस में काम किया। आज मैं आपके सामने डायमंड क रूप में हूँ।
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गोमाराम डूक्या
गोमाराम डूक्या सफर: मार्बल गोदाम से शिक्षा: बी.ए. फाइनल पता: मु.पो. त्योद, त. किशनगढ आई.डी. नं.: 12460, 12459 उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी आज समय से कोई अच्छी नौकरी मिलना दुष्वार है। इसलिए मैने किशनगढ के मार्बल एरिया में मार्बल के गौदाम से अपना भाग्य आजमाया। लेकिन मुझे यहां पर आशातीत परिणाम नहीं मिले। मैं कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे आर्थिक रूप से अच्छी पकड़ तो हो ही साथ ही मान-सम्मान और प्रसिद्धि भी मिले। परन्तु व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा और किसी भी अन्य कार्यो के लिए लाखों रूपये की आवष्यकता के चलते मैं कुछ सोच नही पाया। इस दौरान टुलिप बिजनेस का प्लान मेरे सामने आया। मुझे लगा कि यही वो बिजनेस है जो मुझे चाहिए सब कुछ है। फिर मैंने अपनी सारी शक्तियां विचारों की, समय की, शरीर की, साधन की, टुलिप रूपि लक्ष्य में लगा दी। और इस दरमियां आने वाली हर चुनौती का मैंने डटकर सामना किया। और आगे बढता गया। जिसका परिणाम यह रहा है कि आज मैं डायमंड नहीं वरन डबल डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ। यह मैने पूरे भारत में दूसरी डबल डायमण्डशिप प्राप्त की है।
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कंचन कंवर राजपुरोहित
दिलीप सिंह राजपुरोहित (कंचन कंवर राजपुरोहित) सफर: मार्बल में प्राईवेट नौकरी शिक्षा: 8वीं. फैल पता: रत्ना कालोनी, मदनगंज एवं बिदियाद आई.डी. नं.: 11657, 11562 “मेरे सपने बचपन से ही बडे थे परन्तु पढने में रूचि कम होने से मैं कक्षा 8 वीं पास नहीं कर सका। मजबूरन मुझे किशनगढ के मार्बल एरिया में मार्बल गेगंसा मशीन पर बतौर ऑपरेटर नौकरी करनी पड़ी। नौकरी से मिलने वाली छोटी सी तनख्वाह से मंहगाई के दस दौर को देखते हुए जीवन में निराशा सी छाने लगी। इस दरमियां सुनहरे भविष्य को देखते हुए टुलिप बिजनेस जुड़ गया। मैने ईमानदारी व निष्ठा से कुछ महिने कठोर मेहनत की और आज मैं आपके सामने एक डायमंड के रूप में हूँ। इसके साथ ही मैंने टुलिप में अपनी पत्नि कंचन कंवर की आई डी भी लगा दी जिस पर भी डायमंडशिप प्राप्त हो गई। इस प्रकार पूरे भारत में पहले कपल डायमण्डशिप का खिताब मैंने हासिल किया है। अब मेरे परिवार व बच्चों को लेकर मुझे आर्थिक रूप से किसी प्रकार की केाई परेशानी नहीं रह गई है।
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श्रवण छणग
श्रवण छणग सफर: पावरलूम श्रमिक से शिक्षा: साक्षर पता: गांव कुचील त. किशनगढ (अजमेर) आई.डी. नं.: 11841 शिक्षा में केवल साक्षर होने के कारण कोई अच्छी नौकरी या कोई काम मिलेगा ऐसी तो मुझे खुद को उम्मीद नहीं थी। इसलिए मुझे मजबूरन फैक्ट्री में बतौर श्रमिक के रूप में काम करना पड़ा ऐसे में टुलिप बिजनेस प्लान मेरे सामने आया। सीनीयर्स के मार्गदशन और डाउनलेग की मदद करते हुए करीब 4 साल के प्रयासों से केवल साक्षर होते हुए भी मैने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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श्रीमती रेणु कंवर
प्रदीप सिंह राठौड़ श्रीमती रेणु कंवर सफर: मेडीकल स्टोर से शिक्षा: बी.ए. फाईनल पता: कृष्णा मेडीकल स्टोर किशनगढ आई.डी. नं.: 14955, 12166 कुष्णा मेडीकल स्टोर का संचालत करते हुए कुछ नया करने का जज्बा मन में पाले मुझे ऐसे अवसर की तलाश थी। जिसमें समाज में सम्मान बढे और आर्थिक रूप से सक्षमता आने के साथ ही नये लोगो से सम्पर्क भी बढे। इनका मिश्रण टुलिप मे नजर आया और साथ ही जनसेवा करने का मौका भी मिला। टुलिप में अब तक परिवार की 10 आईडी लगा रखी है। इनमें से मेरी पत्नि रेणु कंवर की आईडी में डायमण्डशिप हो चुकी है। इसके अलावा हाल ही में मेरे ना से लगी आईडी में भी डायमण्डशिप हो चुकी है। हांलाकि आर्थिक सम्पन्नता का इष्वरीय आशिर्वाद तो टुलिप से विभिन्न राज्यों, जिलों गांवों व ढाणियों में जो सम्पर्क का खजाना मिला वह अद्भुत है। हजारों लोगों से सम्पर्क के बीच डाउनलेग से मेरा परिवार का रिष्ता बना हुआ है। टीम में गरीब के घरों मे टुलिप ने जो खुशियां दी है उसे देखकर आत्मसंतुष्टि मिलती है।
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लक्ष्मीदेवीं कुमावत
दिनेश कुमावत (लक्ष्मीदेवीं कुमावत, पत्नि) सफर: डेयरी बूथ संचालन से शिक्षा: कक्षा 10 वीं पास पता: मित्र निवास किशनगढ आई.डी. नं.: 16218, 16223 “मैं किशनगढ के राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल के पास एक साधारण सी डेयरी बूथ का संचालन करता था। सुबह बूथ को खोलना और रात को घर चले जाना। इस प्रकार एक सामान्य सा जीवन व्यतीत कर रहा था। कभी किसी दिन में सिंगल नहीं कपल डायमंड बनूंगा, ये तो कभी सपने में भी नहीं सोचा। आज मेरे परिवार को पैसों को लेकर किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। अब कोई चीप खरीदने या खाने से पहले रेट पूछने की जरूरत नहीं होती। यह सब कुछ ट्रेडिशनल बिजनेस में कतई संभव नहीं था।
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मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा सफर: पैट्रोल पम्प पैट्रोल भरने से शिक्षा: 7 वीं पास पता: आदित्य मिल कॉलानी, किशनगढ आई.डी. नं.: 16213, 16228 “पैसा सब कुछ तो नहीं होता परन्तु पैसा बहुत कुछ होता है। इस बात को मैंने काफी करीबी से महसूस किया है। आर्थिक तंगी से में कई बार टूटा मगर मैने कभी हिम्मत नहीं हारी। हमेशा कुछ करने की मन चाह लिये प्रयासरत रहा। पैट्रोल पम्प पर पैट्रोल भरते हुए मैंने यह तो ठान लिया कि मुझे करना जरूर है। टुलिप से पहले कुछ मल्टीलेवल मार्केटिंग भी की मगर अनके प्लान सही नहीं होने से उसमें काफी प्रयास के बाद भी असफलता ही हाथ लगी। जब टुलिप का प्लान मेरे सामने आया तो मुझे इसमें सच्चाई नजर आई। लगभग 22 माह में मैंने टुलिप की डायमण्डशिप प्राप्त कर हाल ही में डबल डायमण्डशिप भी प्राप्त कर ली हैं। आज मेरे खुद के पास एक टाटा सफारी गाडी व शानदार बंगला है। अब मेरे परिवार को एक बेहतर जिंदगी दे सकता हूँ।
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हरजीराम चौधरी
हरजीराम चौधरी सफर: निजी जीप ड्राईवर से शिक्षा: 8वीं पास पता: छणंगो की ढाणी, कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 12819 टुलिप से जुडने से पूर्व मेरे पास एक जीप हुआ करती थी। जिसे मैं सवारी गाड़ी में चलाया करता था। इस कार्य मे मुझे माह के 4-5 हजार रूपये की इनकम हो जाती थी। यह इनकम परिवार की जरूरतों के अनुसार काफी कम थी। ऐसे समय में टुलिप का प्लान मेरे सामने आया। शुरूआती दोर मे ही मैने आईडी तो लगा दी। परन्तु पूर्ण विष्वास नहीं होने से मैने सुचारू रूप से काम करना शरू नही किया। परन्तु जब टुलिप के लोगों के घरो से पैसे आने लगे, गाड़िया आने लगी तो मुझे लगा कि यह सच्ची कम्पनी है। उसके बाद मैने टुलिप मे काम करना शुरू कर दिया। समर्पित भाव व टीम के लोगों का सहयोग करते हुए मैने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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परमाराम डूडी
परमाराम डूडी सफर: प्राईवेट नौकरी से शिक्षा: बी.ए. फाईनल पता: मु.पो. बडू, त. परबतसर (नागौर) आई.डी. नं.: 22063 शिक्षा में बी.ए. फाइनल करने के बाद आर्थिक डगर के लिए प्राईवेट नौकरी का सहारा लेना पड़ा। वर्तमान युग में प्राईवेट नौकरी से मिलने वाली तनख्वाह से परिवार में दो वक्त की रोटी भी सुचारू रूप से नहीं मिल पाती है। ऐसे समय में टुलिप का प्लान मेरे सामने आया। जब मैने टुलिप बिजनेस ज्वाइन किया तो मुझे कतई उम्मीद नहीं थी कि मरे परिवार पर रूपयों की बरसात होगी। चालीस लाख रूपये नकद, प्रतिमाह एक लाख रूपये की रॉयल्टी मिलेगी साथ ही हजारों रूपयों की पेयर इनकम मिलेगी ये कभी सपनों में भी नहीं सोचा था।
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रमेशपुरी गोस्वामी
रमेशपुरी गोस्वामी सफर: निजी विद्यालय का संचालन शिक्षा: बी.ए. पता: मु. शंकर श्योपुरा, त. दूदू (जयपुर) आई.डी. नं.: 17552, 17557 “मैं एक निजी विद्यालय का संचालन करते हुए साधारण सी जिन्दगी गुजार रहा था। इस दौरान मेरे पास एक परिचित के माध्यम से टुलिप प्लान आया। नेटवर्किग की अन्य कम्पनियों को असफलताओं को देखते हुए मुझे भी टुलिप नहीं करनी थी सो उनको टालता रहा परन्तु वो मुझे बार-बार टच करते रहे। आखिर में मैंने टालने के लिए ज्वाईनिंग राशि देकर पिण्ड छुड़ाना चाहा। परन्तु पैसे देने के बाद एक बार पुनः मेरी प्लान देखने की इच्छा हुई। मगर विष्वास फिर भी नहीं हुआ। फिर भी मैंने उनके कहने और यह चैक करने के लिए कि वास्तव में पैसा आता भी है या नही इसलिए मैने काम किया। मैने मात्र 13 दिनों में स्टेप 6 पूरी कर लगभग 27 हजार रूपये कमा लिये। फिर क्या था तेज धूप, आंधी तूफान, चाहे बारिश ही क्यों न रही हो मैंने अपना हौसला कभी नहीं खोया और निरन्तर सफलता की ओर अग्रसर रहा। और इसी का परिणाम है कि आज मैं आपके सामने डायमंड नहीं डबल डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ। सच, अगर मैं अवसर को समझ नहीं पाता तो एक साधारण सा मास्टर बनकर ही रह जाता।
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देवेन्द्र पारीक
देवेन्द्र पारीक सफर: बीमा एजेन्ट शिक्षा: एम.ए. पता: गणेशगंज सरवाड़ (अजमेर) आई.डी. नं.: 23018 टुलिप से पूर्व एक बीमा एजेन्ट के रूप में काम करता था। इसक साथ ही मैने प्रोपर्टी लाईन में भी काम किया। लेकिन यहां पर भी मुझे आशातीत सफलता नहीं मिल पाई। ऐसे समय में टुलिप का प्लान मेरे सामने आया, इसमें मैंने ज्वाइनिंग तो कर ली परन्तु विष्वास नहीं होने के कारण काम नहीं किया। अब्दुल समद साहब-कनीजा बेगम के डायमंड बनने के उपलक्ष्य में आयोजित एक स्नेह भोज समरोह में खुण्डियास जाने का मौका मिला। जहां पर मैं गाड़ियों का काफिला देखकर अभीभूत हो गया। हजारों लाखों रूपये कमाने वाले लोगों से मिला तो मैने भी ठान लिया कि मुझे डायमंड बनना है। और उस दिन का दिन और आज का दिन मैने इस काम को एक मिशन के रूप में किया और आज मैं डायमंड के रूप में आपके सामने सामने हूँ।
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Harchand
सेवाराम छणंग सफर: परचूनी दुकान से शिक्षा: महज साक्षर पता: कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11599, 12106 “मैं किशनगढ के पास स्थित छोटे से गांव कुचील में एक छोटी से परचूनी की दुकान चलाया करता था। सच बताऊँ खुली आंखो को छोड़ कभी सपने में भी करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बनने की बात नहीं सोची। जब टुलिप का प्लान मेरे सामने आया तो यकायक तो मुझे विष्वास नहीं हुआ कि एक बार के अल्प निवेश से इंष्योरेंस सुविधा और एक करोड़ रूपये कमाने का मौका मिल सकता हैं। क्यों कि टुलिप से पहले और बाद कई मल्टीलेवल कम्पनियां आई अगर इन कंपनियों से किसी को भी आर्थिक रूप से सक्षम होते मैंने कभी नहीं देखा और ना ही कभी सुना। इ बीच टुलिप के माध्यम से मैंने लोगों के पास पैसा आते देखा तो मुझे इस सच्चाई पर यकिन करना पड़ा। फिर मैंने टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन करके ढाई साल में एक करोड़पति डिस्ट्री. का खिताब पाया हैं। साथ ही एक आईडी मैंने मेरे बड़े भाई श्री हरचंद जी छणंग के ना मसे भी लगाई जिस पर मैंने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है।”
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शंकर लाल जाट
शंकर लाल जाट सफर: चाय की होटल से कप धोने से शिक्षा: कक्षा 6 पास पता: मु.पो. लाम्बियां खुर्द त. बनेड़ा (भीलवाड़ा) आई.डी. नं.: 47537 मेरे जीवन की शुरूआत चित्तोड़गढ में कलेक्टर चोराहे पर स्थित एक चाय की होटल में कप धोने से हुई। जहां पर मुझे प्रतिदिन एक रूपये की पगार के बदले 16 घंटे का करना पड़ता था। उसके बाद रायला में धागे की मिल में 12 साल काम करके जो पैसा कमाया उससे दो ट्रेक्टर लेकर कम्प्रेशर का काम करने महाराष्ट्र गया। जिसमें मैने 3 लाख रूपये का नुकसान उठाया। इस दरमियां मेरे एक अच्छे परिचित के प्रभाव के कारण मैने टुलिप का फार्म भर दिया परन्तु पैसे थे नहीं इसलिए दिये नहीं। पैसों के लिए कई बार चक्कर लगाने के बाद शर्म के मारे उधार लेकर उनको पैसे दिये। टुलिप में काम करने के बार-बाद दबाव के चलते मैने मात्र दस दिनों में 144 फार्म भरवा दिये। फिर जब काम शुरू किया तो डायमंड लेने के बाद ही दम लिया।
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गौरा देवीं
गौरा देवीं प्रेमचन्द कुमावत सफर: ठेकेदारी कार्य से शिक्षा: कक्षा 6 पास पता: रूपनगढ, त. किशनगढ आई.डी. नं.: 14643 टुलिप से पहले मैं बिल्डिंग ठेकेदारी व मंदिर के शिखर निर्माण का कार्य के ठेके लेता था। बिडिंग ठेकेदारी के कार्य के दौरान मजदूरों कव कार्य समय पर पूरा करके देने की चिंता से में कभी उबर नहीं पाया। परिवार की तंग परिस्थितयों के चलते सशक्त कदम के रूप में मेरे छोटे भाई जो टेलरिंग का कार्य करता था जिसने टुलिप में एक आई.डी. अपनी भाभी (मेरी पत्नि) के नाम से भी लगा दी। परन्तु परिवार की जिम्मेदारी, ठेकेदारी कार्य व रूपनगढ पंचायत समिति सदस्य होने के कारण समय की कमी के रहते मैं इस पर काम नहीं कर पाया। लेकिन छोटे भाई की लगातार मेहनत से यह आईडी स्टेप 14 यानि डायमण्डशिप हो गई हैं। जबकि हमारे परिवार की (प्रेमलता कुमावत पत्नि ओमप्रकाश कुमावत) आईडी भी डायमण्डशिप प्राप्त कर चुकी है।
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मन्नालाल कुशवाह
मन्नालाल कुशवाह सफर: आडे बोर की मशीन से शिक्षा: कक्षा 8 पास पता: ग्र्राम लहास, त. अकलेरा (झालावाड़) आई.डी. नं.: 149791 मैं गांव में थोडी सी जमीन पर काष्तकारी करके घर गुजारा किया करता था। साईड बिजनेस के रूप में आडे बोर की मशीन चलाया करता था। मैं एक मध्यम श्रेणी की जिन्दगी जी रहा था। ऐसे समय में मेरे पास देवदूत के रूप में विजय जी टांक (डबल डायमंड) संयोगवश मिले। इन्होने टुलिप के बारे में बताया। टुलिप में ज्वाईनिग करके ईष्वर के आशिर्वाद से लगभग 21 महीने में डायमंड की उपाधि प्रापत की तथा करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बना। पहले में एक-एक रूपये के लिए तरसता था। आज मेरे पक्का मकान व टाटा इंडिका कार है।
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बाबूलाल अजमेरा
बाबूलाल अजमेरा सफर: मैकेनिक लाईन से शिक्षा: 8वीं पास पता: मालियों की ढाणी, पुरूषोत्तम नगर, किशनगढ, अजमेर (राज) आई.डी. नं.: 12953 “मै टुलिप से पूर्व किशनगढ में श्री अजमेरा आँटो रिपेयरिंग सेन्टर एवं आँटो पार्टस की दुकान किया करता था। एक बार एक मोटर साईकिल सवार ने मेरे टक्कर मार दी। भगवान का शुक्र रहा मेरे ज्यादा नहीं लगी। ऐसे में गोविन्दरामजी डूक्या जा टुलिप में काम कर रहे थे। उन्होने मुझे कहा कि आप भी टुलिप का फार्म भर दो जिस तरह से आपका एक्सीडेन्ट हुआ किसी का भी हो सकता है किसी के चोट भी आ सकती है, अगर उसका बीमा होगा तो इलाज का पैसा उस व्यक्ति को मिल जायेगा। फिर मैंने उनकी बात मानते हुए टुलिप का फार्म भर दिया और मैने काम शुरू कर दिया और आज मैं डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ।
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भंवर सिंह राठौड़
भंवर सिंह राठौड़ सफर: प्राईवेट नौकरी-बीमा एजेन्ट से शिक्षा: बारहवीं पास पता: मु.पो. बुबानिया, वाया नसीराबाद (अजमेर) 76, कुम्भा नगर, सालमपुरा (राजसमन्द) आई.डी. नं.: 37207 “मैने इस वर्ष तक प्राईवेट कंपनी में काम किया है। वेतन दो हजार से ढाई हजार ही मिल पाता था। जो परिवार की आवष्यकतानुसार कम था और हर समय तंगी रहती थी। बाद में सन् 2002 में एक सम्मानित संस्था व जीवन बीमा कम्पनी की एजेन्सी लेकर काम करते हुए पहचान बनाई। 2006 में री बंशीलालजी मालाकार के मार्गदर्शन से टुलिप बिजनेस की शुरूआत की, समाज सेवा व मानवता की सेवा करते हुए लगभग तीन वर्ष मे मैंने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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हीरालाल छणंग
हीरालाल छणंग सफर: ट्रैक्टर चलाते हुए शिक्षा: कक्षा 4 वीं पास पता: कुचील (किशनगढ) आई.डी. नं.: 12081, 12456 ’मैं किशनगढ में मार्बल एरिया में ट्रैक्टर चलाया करता था और पूरे दिन काम करने के बाद महिने के कुल 7-8 हजार रूपये कमा पाता था। इस दरमियां टुलिप प्लान मेरे सामने आया। मुझे बताया गया क इस प्लान से करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बना जा सकता है तो मुझे यकीन नही हुआ। परन्तु जब प्लान को मैने ठीक तरह से समझा तो मुझे विष्वास हुआ। फिर मैंने भी अपने भाईयों की सहायता से टुलिप बिजनेस को करना शुरू किया। शुरूआती दौर में जब मैने अपने मिलने वालों को टुलिप का प्लान बताया तो लोगों ने मेरी बसत का विष्वास नहीं किया। फिर टुलिप से लोगों को सफल होते मेरे प्रयास भी रंग लाने लगे और धीरे-धीरे लोगों को समूह मेरे साथ इस बिजनेस में आता गया। टुलिप से जुड़कर लगभग 30 महिने में मैं एक बार करोडपति डिस्ट्रीब्यूटर बना हूं। साथ ही अभी हाल ही में मैंने डबल डायमंड का खिताब भी हासिल कर लिया है।
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कनीजा बेगम
कनीजा बेगम प्रेरणा स्त्रोत: श्री अब्दुल समद (पति) सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: 5वीं पास पता: किशनगढ (अजमेर) आई.डी. नं.: 11455, 11523,11487 “मैं एक मध्यम श्रेणी परिवार की साधारण गृहणी थी, एक करोड़पति छोड़ लखपति होने का भी कभी सपने में भी नही सोचा था। मार्केटिंग कम्पनियों में लोगों को असफल होते हुए देख शुरू से ही मेरे इनके प्रति नेगेटिव भाव रहे। जब टुलिप प्लान मेरे सामने आया तो इसके साफ सुथरे प्लान और व्यक्क्तिगत व परिवार की सुरक्षा योजना से मैं काफी प्रभावित हुई और मैने टुलिप ज्वॉइन कर लिया। फिर एक लक्ष्य की भांति कठिन मेहनत कर मैने मात्र 22 महिनों के एक अल्प समय में स्टेप 14 पूरी कर प्रथम डायमण्डशिप प्राप्त की ली। मेरे इस प्रयास में मेरे पति मार्केटिंग गुरू श्री अब्दुल समद साहब का विशेष सहयोग रहा। इसके साथ ही मेरी हाल ही में प्रथम महिला डबल डायमण्डशिप भी हो गई है। मेरी पुत्री निलोफर परवींन की 120वीं डायमण्डशिप के साथ ही हमारा डायमंड से स्टेप 6 का लक्ष्य भी पूरा हो गया है।
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मनोज सैनी
मनोज सैनी सफर: पढाई करते हुए शिक्षा: पता: 76, कुम्भा नगर, सालमपुरा (राजसमन्द) आई.डी. नं.: 11201 “पढने के साथ-साथ अपने खुद के दम पर कुछ करने की इच्छा मन पाले हुए था। क्योंकि मै जानता था कि सरकारी नौकरी आसानी से उपलब्ध नहीं होती है और नौकरी मिल भी गई तो उसमें मेरे सपने पूरे नहीं हो पायेगे। साथ ही बिजनेस के लिए चाहिये थे लाखों रूपये और उसमें भी भारी प्रतिस्पर्धा। इसलिए मुझे किसी ऐसी राह की तलाश थी जिससे मैं सम्मान के साथ अपने व अपने परिवार के सपनों के पूरा कर सकूँ। ऐसे में मेरे बड़े भ्राता श्री विनोद सैनी (डायमंड) ने मुझे टुलिप बिजनेस के बारे में बताया। फिरे मैंने भी मेरे भैया श्री विनोद जी सैनी के मार्गदशन में टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन कर लिया। और उनके बताये अनुसार इसमें काम किया। जिसका परिणाम रहा कि आज में आपके सामने डायमंड डिस्ट्रीबुटर के रूप में हूँ।
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नंदरामी घंसवा
हरजीराम चोधरी नंदरामी घंसवा (पत्नि) सफर: टी स्टाल व खान मजदूर से शिक्षा: 5 वीं पास पता: मु. कल्याणीपुरा, (किशनगढ) आई.डी. नं.: 11653,12187 “मैंने पत्थरों की चुनाई का कार्य किया, किशनगढ में टी-स्टॉल चलाई, फिर खान पर मजदूरी करने कटनी (एमपी) चला गया। महीने भर काम करके करीब 4-5 हजार रूपये कमा पाता था। इससे हमेशा आर्थिक संकट का साया छाया रहता था। परन्तु मैं भगवान को उस पल के लिए धन्यवाद देता हूँ जब उसने टुलिप से जुडने के प्रस्ताव पर मुझसे ना की जगह हाँ कहलवा दी। और एक हाँ मेरे लिए वरदान साबित हुई। टुलिप मे मुझे सुनहरा भविश्य नजर आया और मैं निकल पड़ा इस मिशन को पूरा करने के लिए। फिर कभी पीछे मुडकर के नहीं देखा। और करीब 29 महिने मेंएक करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर का यानि डायमंड का खिताब प्राप्त कर आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर ली। इसके साथ ही हाल में मेरी पत्नि नंदरामी घंसवा के नाम से लगी आई में भी डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। यानि हम कपल डायमंड बन गये है। अब भगवान की कृपा से पैसों को लेकर मुझे किसी ओर देखने की जरूरत नही है यानि टुलिप बिजनेस में मैंने बी.ए. पास कर ली है।
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सरमेश कंवर
पप्पू सिंह राठौड़ सरमेश कंवर (पत्नि) सफर: प्राईवेट नौकरी से शिक्षा: 9वीं पास पता: किषोर नगर, मण्डा, राजसमन्द आई.डी. नं.: 39547, 40725 पढाई छोडने के बाद 10 साल मार्बल माईन्स में मशीन औपरेटर के पर कार्य करते हुए कभी मैं करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बन जाऊंगा सपने में भी नही सोचा था। एक दिन बंषीलाल जी मालाकार व बडे भाई भंवर सिंह जी राठौड़ मेरे पास आये व मुझे टुलिप के बारे में बताया कि इसमें इंष्योरेन्स भी होगा व पैसा भी कमा सकते हैं। शुरूआती दौर में मुझे इनकी बातों पर विष्वास नहीं हुआ। परन्तु जब लोगों को इसमे सफल होते देखा तो मुझे इस प्लान पर विष्वास हुआ कि वास्तव में इसमे आर्थिक स्वतंत्रता जा सकती है। फिर मैने बंषीलालजी व भाईसाहब के सहयोग से लगातार मेहनत करते हुए लगभग 27 महिने में डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। जिन्दगी भर माईन्स पर नौकरी करने से जितना पैसा मैं नहीं कमा पाता उतना पैसा मैने कुछ महिनों में ही मेहनत से कमा लिये। इसके साथ ही जो मान-सम्मान और जबरदस्त जनसम्पर्क बना वो अलग है।
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शैतान सिंह मीणा
शैतान मीणा सफर: जनरल स्टोर व चाय की दुकान शिक्षा: कक्षा 12 पास पता: अग्रवाल विश्राम गृह, देवली 76, कुम्भा नगर, सालमपुरा (राजसमन्द) आई.डी. नं.: 35623 मैने अपनी जिन्दगी की शुरूआत एक जनरल स्टोर से चाय की दुकान से की और इसी बीच मेरे बडे अंकल गोपाल जी व रमेश जी मीणा ने मुझे टुलिप के माध्यम से बीमा करवाने के बारे में कहा और मैने बीमा के माध्यम से टुलिप ज्वाइनिंग ली और ज्वॉइनिंग लेने के दूसरे ही दिन रमेश जी मीणा ने मेरे को 500 रूपये का चैक लाकर दिया और चैक लेने के बाद मैंने प्लान की अच्छी तरह से समझा और देखा कि इसमें पैसों के साथ-साथ समाज सेवा भी होती है और उसी दिन से लेकर आज तक मैने कठिन प्रयासों से बहुत कम समय में स्टेप 14 प्राप्त कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरी इस सफलता में मेरे अपलाईन व डाउनलाइन का विशेष सहयोग रहा है।
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प्रहलाद सिंह
प्रहलाद सिंह सफर: प्रगतिशील किसान से शिक्षा: बी.ए. बी.एड. पता: मु.पो. श्यामपुरा, धोद (सीकर) आई.डी. नं.: 154242 मैने बी.ए पास करने बाद बी.एड किया। आजीविका के लिए मैं सीकर जिले में आर्गेनिक खेती व फूलों की खेती तथा डेयरी में प्रगतिशील किसान के रूप में कार्यरत था। उस समय शर्मा दूध डेयरी के संचालक संजयजी शर्मा ने मुझे टुलिप के प्लान के बारे में बताया टुलिप बिजनेस के बारे में विस्तार से जानने के बाद लगा कि मुझे भी इस बिजनेस को ज्वाइन करना चाहिए। उसी समय टुलिप जिनेस में दो आईडी लगा दी। जिसमेंसे मैंने एक आईडी पर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। दूसरी आईडी जो मेरी पत्नी भगवती देवी के नाम से है। मुझे विष्वास है कि उसमें शीघ्र ही डायमण्डशिप हो जायेगी। मैं अपनी इस सफलता के लिए पूरा श्रेय कर्मठ लगनशील प्यारी-प्यारी डाउन लाइन को देता हूँ।
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भवानी सिंह मीणा
भवानी सिंह मीणा सफर: पैट्रोल पम्प पर कार्य से शिक्षा: कक्षा 12 पास पता: ग्राम सालक्ष्मणा (देवली) आई.डी. नं.: 35620 मैने मेरी जिन्दगी की शूरूआत पढाई के पष्चात् सिक्योरिटी गार्ड व उसके बाद पैट्रोल पम्प कर कार्य से की। इसी बीच मेरे बडे भाई साहब गोपाल जी मीणा व रमेश जी मीणा के माध्यम से टुलिप कम्पनी में ज्वॉइनिंग की। मैने अपने भाई साहब रमेश जी मीणा के विशेष सहयोग से अल्प समय में डायमण्डशिप प्राप्त की। टुलिप से पहले हमारे पास एक साईकिल भी नहीं थी। आज टुलिप कम्पनी द्वारा हमारे सभी सपने पूरे हुए है। अब मैं आर्थिक रूप से स्वतन्त्र हूँ। मेरी सफलता में अपलाइन व डाउनलाइन टीम के स्टार लीडर्स का विशेष सहयोग रहा हैं।
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डॉ. इब्राहीम खान कायमखानी
डॉ. इब्राहीम खान कायमखानी सफर: प्राईवेट क्लिनिक से पता: पहाड़गंज मंडोर रोड़ जोधपुर आई.डी. नं.: 43304 मैने एम.डी शिक्षित करने के बाद शिक्षित करने के बाद जोधपुर में प्राईवेट क्लिनिक का संचालन किया। मैने पाया कि कई लोग आर्थिक कमजोरी की वजह से अपना सुचारू रूप से इलाज नहीं करा पाते थे। कई लोगों को गरीबी के कारण भी बीमारियां होती थी। उनकी मेहनत का काफी पैसा इलाज मे चला जाता था। ये सब देखकर में काफी क्षुब्ध हो जाता था। ऐसे में मुझे टुलिप बिजनेस प्लान की जानकारी मिली। श्री अब्दुल समद साहब, श्री गौतम नवल व श्री दिलीपसिंह राजपुरोहित ने मुझे टुलिप डिस्ट्री. को मिलने वाली बीमा सुविधा के बारे में विस्तार से बताया। मुझे लगा कि इसके द्वारा आम लोगों को बीमा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। ऐसे में मैने भी टुलिप बिजनेस ज्वॉइन कर लिया। टुलिप में लगातार सेवा कार्य से मैने डायमंडशिप प्राप्त की ली है।
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भैरूलाल पटवा
भैरूलाल पटवा सफर: बीमा एजेन्ट शिक्षा: बी.ए. पता: वृन्दावन कॉलानी, रामगंज मंडी, कोटा आई.डी. नं.: 101015, 101013 दोस्तों, टुलिप से पूर्व में मैं एक सामान्य सी जिंदगी जी रहा था। बतौर बीमा एजेन्ट के रूप में काम करते हुए 15 हजार रूपये प्रतिमाह कमा रहा था। कोई विशेष आर्थिक परेशानी बिलकुल नहीं थी। लेकिन पैसे वालों के पास शानदार गाड़ी, आलीशान बंगला और जबरदस्त बैंक बैलेन्स देखकर दिन मचल उठता था। में भी सोचता था कि काश मेरे पास भी ऐसा होता। मेरे भी सपने पूरे होते। परन्तु जो काम कर रहा था उससे यह यह संभव नहीं था। एक दिन विजय टी टाक साहब (डबल डायमंड) व एम.एल. नागर (डायमंड) साहब ने मेरे पास टुलिप बिजनेस प्लान लेकर आये। प्लान को ठीक तरह से समझ करव आष्वस्त होकर टुलिप बिजनेस मैंने शुरू किया। लगातार लगन व मेहनत से मैंने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। वहीं हाल ही में मैंने डबल डायमण्डशिप भी प्राप्त कर ली हैं। यानि डबल करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बन गया हूँ। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम को लोगों के घरों में भी आर्थिक सक्षमता आये। उनके सपनों को भी टुलिप के माध्यम से धरातल मिले।
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वनेसिंह जोगसिंह राजपूत
वनेसिंह जोगसिंह राजपूत भागीरथ सिंह राजपूत सुप्यार कंवर वीं. राजपूत सफर: सैल्समेन शिक्षा: कक्षा 10 पास पता: नंदूरबार (महाराष्ट्र) आई.डी. नं.: 153701, 178823, 156087 मैने (वनेसिंह जोगसिंह) अपने जीवन की शुरूआत रिटेल कपड़े के शोरूम पर एक सैल्समेन के रूप की और यह काम मैने 5 साल तक किया। उसके बाद मैने स्वयं का काम करने की सोची और खुद के कपडे की रिटेल की और 20 साल तक दुकान चलाई। परन्तु दुकान से एक सीमित इनकम और रूटीन कार्य से मैं संतुष्ट नहीं हो पा रहा था। इसलिए इस दरमियां मैने कुछ एमएलएम कम्पनियां भी की। परन्तु यहां पर हाथी के दांत खाने के और दिखाने के आरे होते थे। इस बीच मेरे रिलेटिव ने टुलिप ग्लोबल का प्लान दिखाया। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर तहत सेवा करने का मौका भी हमे मिलता है और इनकम तो असिमित। ऐसे में मैने टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन कर लिया और अल्प समय में ही इसके बेहतरीन प्लान के बूते पर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मैने टुलिप बिजनेस में राजस्थान के बाद अन्य स्टेट में पहली बार डायमण्डशिप प्राप्त की है। वहीं हाल ही में मैने मेरे पुत्र भागीरथसिंह वनेसिंह राजपूत एवं मेरी पत्नि सप्यार कंवर वनेसिंह राजपूत के नाम पर लगी आईडी पर भी डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरी डाउन टीम से मेाहन लाल कुमावत व सीमा मोहनलाल कुमावत को भी डायमण्डशिप प्राप्त हो गई है।
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विश्राम मालाकार
विश्राम मालाकार सफर: पढाई करते हुए शिक्षा: कक्षा 12 फेल पता: कुचील, त. किशनगढ (अजमेर) आई.डी. नं.: 11655 मुझे पढाई करते हुए कुचील निवासी सेवारामजी छणंग (डायमंड) ने टुलिप बिजनेस के बारे में बताया। मैं हमेशा पैसा कमाने के लिए कुछ अलग करने की सोचता रहता था। जिसमें शानदार इनकम हो, जिससे मैं भी अन्य लोगों की तरह भौतिक संसाधनों का उपयोग कर सकूँ। अपने ढेरों अरमानों को पूरा कर सकूँ। सेवारामजी के प्लान में मुझे वो सब कुछ नजर आया। मुझे लगा कि टुलिप मेरे लिए जीवन का वरदान साबित होगा। फिर मैने भी ठान लिया कि टुलिप डायमंडशिप तक के लक्ष्य को मुझे ही पाना है। और आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। इस दरमियां मेरे सामने सिर्फ चिडियां की आंख थी। मेरे रास्ते में कई मुष्किले भी आई मगन मैने उनका डटकर मुकाबला किया और आगे भी बढता गया।
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अशोक चौधरी
अशोक चौधरी प्रेरणा स्त्रोत: खेताराम चौधरी (पिता) सफर: पढाई करते हुए शिक्षा: अघ्ययनरत पता: मदेरणा कॉलानी, जोधपुर आई.डी. नं.: 110911 मैं अशोक चौधरी पुत्र श्री खेताराम चौधरी जोधपुर निवासी, मैने 3.12.2007 को टुलिप बिजनेस शुरू किया। मेरे घर पर श्री दिलीपसिंह जी राजपुरोहित (प्रथम कपल डायमंड), डा. इब्राहीम खां, श्री गौतमराज जी नवल, री हरिराम पूनिया ने मेरे पिताजी को टुलिप बिजनेस के तहत मिलने वाली बीमा सुविधा के बारे में बताया। तब मेरे पिताजी मेरे नाम टुलिप बिजनेस प्रारम्भ किया। टुलिप बिजनेस में सेवा भावना से काम करते हुए अल्प समय में ही हमने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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ओमपुरी गोस्वामी
ओमपुरी गोस्वामी संतरा देवीं गोस्वामी (पत्नि) सफर: लैथ मशीन मिस्त्री शिक्षा: कक्षा 9 वीं पास पता: मु.पो.ठठना, मीठड़ी (नागौर) आई.डी. नं.: 21941, 38973 कक्षा 9 पास करने के बाद मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होन के कारण आटा चक्की मशीन फैक्ट्री में लैथ मशीन मिस्त्री के रूप में काम करना पड़ा। एक बार जब रमेशपुरी जी गोस्वामी मेरे पास टुलिप का प्रोग्राम लेकर आये तो मै इनपे गुस्सा हुआ कि ये क्या लेकर आ जाते है। रमेशजी ने मुझे जोडने का बार-बार प्रयास किया। एक बार जब रमेशजी आये तो मेरे गांव के एक फौजी साहब ने कहा देखो ये क्या प्रोग्राम है। तो उन्होने इसमें विष्वास जताते हुए 10 फार्म भर दिये। तो मुझे लगा कि अगर इन्होने इस फार्म के पैसे दिये है तो अपने को भी 1 फार्म के पैसे देने में क्या दिक्कत है। परन्तु फिर भी मैंने इसमें रूचि लेकर काम नहीं किया। एक बार मेरे हाथ में फैक्चर हो गया था। तो रमेशजी ने मेरा इलाज में होने वाले करीब 5 हजार रूपये मुझे टुलिप के मार्फत इंषोरेन्स कम्पनी से दिलवा दिये। उसके बाद मैने गभ्भीरता से टुलिप का काम करना शुरू कर दिया। आज में आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। साथ ही मेरी पत्नि संतरा देवीं के नाम से लगी आईडी भी डायमण्डशिप हो गई है। यादि हम कपल डायमंड बन गये है।
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महावींर राव़
महावींर राव़ सफर: मार्बल व्यवसायी शिक्षा: 9वीं पास पता: 162, साई निवास, इन्द्रा नगर, किशनगढ आई.डी. नं.: 38402, 40385 मै टुलिप से पूवॆ मार्बल हैण्डीक्राफ्ट का काम किया करता था। जिसमें काफी मेहनत के बाद मुष्किल से माह के 8-10 हजार रूपये ही कमा पाता था। जिससे परिवार पर हमेशा आर्थिक तंगी का असर नजर आता था। ऐसे समय में टुलिप प्लान मेरा पास आया। परन्तु नेटवर्किग बिजनेस से लोगों की असफलता होते ही ज्यादा देखा। इसलिए शुरूआती दौर में मैं नेगेटिव रहा। मैं इसमें रूचि नही ली। पर जब टुलिप से अप लाइन से लेकर डाउन लेग तक सभी के पास पैसा आता देखा तो मैं अपने आप को भी टुलिप करने से नहीं रोक पाया। टुलिप में शानदार आय के साथ ही ढेर सारा सम्मान, सुरक्षा व सेवा कार्य से मैं बहुत प्रभावित हुआ। मेरी डायमण्डशिप होने से मेरे व मेरे परिवार की खुशियों का कोई ठिकाना ही नहीं है। मैं मेरे अप लाईन लीडर्स व डाउन टीम का ह्दय से अभारी हूँ। मेरी डाउन टीम से भी डायमंड बने मैं इसके लिए लगातार प्रयासरत हूँ।
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किरण तिवारी
सत्यनारायण तिवारी आईडी: किरण तिवारी (पत्नि) सफर: प्राईवेट स्कूल संचालन शिक्षा: बी.ए. पता: दाधीच कालोनी किशनगढ आई.डी. नं.: 57469 मैं बी.ए. तक शिक्षित होने के बाद प्राईवेट स्कूल खोलने का निर्णय लिया। ऐसे में टुलिप बिजनेस प्लान मेरे सामने आया। शुरूआती दौर में मैं इससे काफी नेगेटिव हुआ करता था। लेकिन मेरी यह अवधारणा गलत तब साबित हुई जब मैने लोगों को इससे लखपति करोड़पति होते हुए अपनी आंखों से देखा। इसके बाद मैंने भी टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन कर लिया और आज आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ।
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अभय सिंह चैहान
अभय सिंह चौहान सफर: प्राईवेट नौकरी शिक्षा: कक्षा 9 पास पता: गुन्जोल रिछोलिया, नाथद्वारा (राजसंमद) आई.डी. नं.: 44428 दोस्तों, मैं टुलिप से पूर्व प्राईवेट नौकरी किया करता था। प्राईवेट नौकरी से मिलने वाली तनख्वहा परिवार की आवष्यकतानुसार बहुत कम थी। इस बीच मेरे पास टुलिप बिजनेस प्लान आया। टुलिप बिजनेस में शानदार आय को देखते हुए मैंने इस ज्वॉइन कर लिया। मैन देखा कि टुलिप मे बेहतरीन इनकम से साथ ही साथ जबरदस्त सामान भी मिलता है। टुलिप बिजनेस में लगातार सेवा भावना और एक दूसरे के सहयोग की भावना से काम करते हुए मैने अल्प समय में ही स्टेप 14 प्राप्त कर ली।
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अगफर नवाब बेग
अगफर नवाब बेग सफर: प्राईवेट बैंक में लोन प्रतिनिधि शिक्षा: बी.ए. पता: 78, गीता नगर, इंदौर (म.प्र.) आई.डी. नं.: 328793, 44398 दोस्तों, मैं टुलिप से पूर्व एक प्रतिष्ठित प्राईवेट बैंक में बतौर डी.एस.ए. कार्य करता था। टुलिप बिजनेस के बारे में मुझे मेरे मित्र ने बताया मित्र के जबरदस्ती करने के कारण मैंने बला टालने के लिए ज्वाइनिंग राशि दे दी। फिर प्लान को ठीक तरह से समझकर 28 आईडी के साथ काम शुरू किया। वहीं शेयर बाजार में आई अचानक गिरावट से बैंक ने पर्सनल लोन देना बन्द कर दिया। लोन कार्य बंद होने के कारण फिर मैंने टुलिप बिजनेस को फुल टाईम के रूप में अपना लिया। जिसका परिणाम रहा कि मेरे टाइम तक सबसे कम समय में डायमंड बन सका। साथ ही हाल ही में मैने 121 वें डायमंड के साथ ही डबल डायमण्डशिप भी प्राप्त कर ली है।
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कजोड़पुरी गोस्वामी
कजोड़पुरी गोस्वामी सफर: कृषि कार्य से शिक्षा: कक्षा 6 पास पता: मु.पो. ठठना, मिठड़ी (नागौर) आई.डी. नं.: 21943 दोस्तों, मैं टुलिप से पूर्व कृषि (खेती) का कार्य करता था। एक दिन मेरे भाई ओमपुरी गोस्वामी (डायमंड) मेरे पास आए और उन्होने मुझे टुलिप का प्लान बताया। मुझे प्लान पर विष्वास नहीं होने के कारण मैने ज्वॉइन नहीं किया। परन्तु उनके बार-बार कहने पर मुझे मजबूरन टुलिप बिजनेस ज्वॉइन करना पड़ा। उसके बाद मैने ठीक तरह से प्लान को जाना व समझा। फिर मैने धीरे-धीरे अपने भाई के साथ काम करना शुरू कर दिया। लगातार मेहनत व डाउन टीम के प्रति सहयोग की भावना से मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ।
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श्योजीराम डोड़वाड़िया
श्योजीराम डोड़वाड़िया सफर: टेªक्टर व जीप ड्राईविंग, किराणे की दुकान, शिक्षा: कक्षा 10 पास पता: मु.पो. पिंगलोद, वाया सलेमाबाद (किशनगढ) आई.डी. नं.: 12462 दोस्तों, मैं टुलिप से पूर्व ट्रेक्टर चलाता था। फिर मैने सलेमाबाद से किशनगढ तक जीप चलाई। सलेमाबाद में 1 साल तक किराणे की दुकान चालाई। बैंगलोर में टांसपोर्ट कम्पनी खोली और यहा भी मुझे असफलता ही मिली। ऐसे में मैने टुलिप बिजनेस ज्वॉइन कर लिया। फिरे मैने टुलिप बिजनेस को समर्पित व सहयोग की भावना से किया और आज में आपके सामने डायमंड यानि करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में हूँ।
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Murlidhar Vaishnav
 
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हितेष भारद्वाज
हितेष भारद्वाज सफर: मोबाईल सैल्समैन से शिक्षा: बी.ए. पता: कथारियों का मोहल्ला, किशनगढ आई.डी. नं.: 20233 दोस्तों, आर्थिक तंगी से स्थिति ऐसी हो गई कि जीवन निरस सा लगने लगा था यूं कहे तो जिंदगी एक बोझ सी लगने लगी थी। ऐसे में भगवान के आशीवाद स्वरूप मुझे डायमंड मुकेश जी शर्मा के टुलिप बिजनेस का प्रस्ताव मिला। घोर निराशा के बीच मैं पल के लिए प्रभु का शुक्रगुजार हूँ जिसने मुझे टुलिप के लिए हां कहलवा दी। टुलिप बिजनेस की बदौलत आज मैं डायमंड यानि एक करोड़पति डिस्ट्रीबूटर के रूप में आपके सामने हूं। सच, टुलिप मेरी जिंदगी में एक बहार बनकर आई है। मुझे टुलिप से उम्मीद से भी ज्यादा मिला है। टुलिप स सहायतार्थ मिलने वाली बीमा सुविधा से लोगों की सेवा भी होती है।
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विजय सिंह सिसोदिया
विजय सिंह सिसोदिया मोती सिंह सिसोदिया सफर: प्राईवेट स्कूल से शिक्षा: बी.ए. पता: बडू, परबतसर (नागौर) आई.डी. नं.: 21629, 21628 दोस्तों, टुलिप से पूर्व मैं (विजयसिंह सिसोदिया) प्राईवेट स्कूल का संचालन करता था। इस दरमियां दिलीपसिंह जी राजपुरोहित ने मुझे टुलिप बिजनेस का प्लान बताया। परन्तु मैं हमेशा ही नेटवर्किग कम्पनियों से नेगेटिव ही रहा इसलिए टुलिप बिजनिस के प्रस्ताव को भी टालता रहा। परन्तु दिलीप जी के बार-बार कहने व प्रेशन डालने पर मैने टुलिप में अपने भाई मोतीसिंह जी सिसोदिया व मेरे नाम से आईडी लगा दी। परन्तु जब मैने देखा कि टुलिप बिजनेस से लोगों को आर्थिक संबल मिल रहा है। तो फिर मैंने भी टुलिप बिजनेस को पूर्ण तरीके से समझकर विधिवत रूप से करना शुरू कर दिया। फिर कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। मैंने सबसे पहले आपने बडे भाई साहब मोतीसिंह जी के नाम से लगी आईडी पर डायमण्डशिप प्राप्त की और अभी हाल ही में मैने अपने नाम से लगी पर भी डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरे भाईसाहब जा रजाई गद्दे का काम करते थे कभी टुलिप ऑफिस तक भी नही गये। वे पहली बार मेरी डायमडशिप का चैक लेने जयपुर ऑफिस गये। अब मेरा प्रयास है कि मेरी टीम के स्टार लीडर्स भी शीघ्र ही डायमंड प्राप्त करें और इसके लिए मैं प्रयासरत हूँ।
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बलराम साहू
बलराम साहू सफर: ट्रेक्टर सैल्समेन से पता: ग्राम सींगनपुर, पो. मृगवास त. कुम्भराज, जिला-गुना (मध्यप्रदेश) आईडी: 197454 सामान्य सी जिन्दगी जीते हुए एक ट्रेक्टर एजेन्ट के रूप में काम करते हुए दस हजार रूपये प्रतिमाह कमा रहा था। लेकिन पैसे वाले लोगों को देखकर दिल मचल उठता था। लग्जरी गाड़िया व शानदार आलीशान बंगलों को देखकर मेरी भी उन्हे पाने की इच्छा हेाती थी। ऐसे मे परमात्मा ने मुझे एक ऐसी राह दिखाई जिससे मेरे सपनों को हकीकत का धरातल मिल सके। एक बार मेरे दोस्त रामनाथसिंह राजपूत एवं मन्नालालजी कुशवाह जी ने मुझे टुलिप योजना एवं व्यवसाय के बारे में बताया। मैने इस प्लान को लोगों को सुरक्षा एवं आर्थिक स्वतंत्रता पहुंचाने के भाव से ज्वॉइन किया। फिर काम चालू किया और टीम का सहयोग करते हुए आगे बढता गया। इसी के फलस्वरूप आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ।
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Rukaiya Banu
 
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पप्पू कंवर चारण
पप्पू कंवर चारण सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: 5वी. पास पता: के.के. कॉलानी, सांगरिया रोड़ जोधपुर आईडी: 165924 टुलिप से पूर्व भी मेरी आर्थिक स्थिति सुदृढ ही थी। परन्तु मेरे रिष्तेदारों एवं दूसरों को भी जनसेवा करते हुए अच्छी आय दिला सकूँ, इस उद्देष्य से मैंने टुलिप ज्वॉइन किया। एक साथ नौ आईडी लगाकर मैने अधिक आईडी लगाने एवं इससे अच्छी आय प्राप्त करने की परम्परा चालू की थी, जो कि मेरी डाउन लाईन में भी यह सिलसिला जारी है। टीम में परस्पर सहयोग की भावना से काम करते हुए आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। मैं श्रीमती एवं श्री पी.सी. जैन साहब का धन्यवाद देना चाहूँगी जिन्होने आय के साथ मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाकर जनसेवा का अनूठा उदाहरण पेष किया है।
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मनोहर चौधरी (चोटिया)
मनोहर चैधरी (चोटिया) सफर: सैल्स मैनेजर से शिक्षा: एम.ए. पता: मु.पो. बडू, त. परबतसर, नागौर (राज.) आईडी: 35017 मैं टुलिप में आने से पहले मुम्बई में एक कम्पनी में सैल्स मैनेजर पद पर कार्यरत था। इसी बीच मेरी परमाराम जी डूडी एवं छोटे भाइ वेदप्रकाष चोटिया द्वारा टुलिप बिजनेस प्लान के बारे में जानकारी दी गई। तो इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस प्लान को करते हुए मैं जिंदगी के वो हर सपने साकार कर सकता हूँ जो मेरे दिल में संजोकर रखे थे। इस सोच के साथ में टुलिप प्लान में शामिल हुआ। जिसकी बदौलत मैने स्टेप 14 पूरी डायमण्डशिप का खिताब प्राप्त कर लिया है।
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ललित मोहन साहू
ललित मोहन साहू सफर: प्राइवेट नौकरी से शिक्षा: बी.ए., आईडी: 328803 पता: 51, धीरज नगर, एम.आर.-9 रिंग रोड़ इन्दौर (म.प्र.) दोस्तों, मैं मूल निवासी उड़ीसा का हूँ। दस साल में रहकर प्राईवेट कम्पनी में नौकरी कर जिंदगी गजारा करता था। जुलाई 2008 में मेरे एक पुराने कलिक से टुलिप ग्लोबल प्रा.लि. प्लान देखा और ज्वॉइनिंग ली। उसके बाद डायमण्डशिप को लक्ष्य बनाते हुए मैंने 20 महिनों में डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरे इस सफर में बहुत सारी समस्याएं आई मगर मेरे अप लाइन कपल डायमंड दिनेश जी कुमावत की प्रेरणा और मेरे साथ सफल करने वाले मेरे दोस्त अगफर नवाब बेग (डायमंड) का मार्गदशन व डाउनलेग का विशेष सहयोग मिला।
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अतरसिंह डागुर
अतरसिंह डागुर सफर: कृषि कार्य से शिक्षा: 8 वीं पास पता: उटारदा, त. नदबई (भरतपुर) आईडी: 121097 कृषि कार्य करते हुए कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतने कम समय मे इतनी बड़ी सफलता मुझे मिलेगी। कम शिक्षित व्यक्ति को इतनी ऊँचाईयों पर पहुँचने में टुलिप ग्लोबल प्रा.लि. का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। टुलिप बिजनेस में मैने तो डायमण्डशिप प्राप्त की है साथ ही मेरी डाउन लाइन से भी लोगों ने अच्छी सफलता हासिल की है। सच, टुलिप बिजनेस में जबरदस्त इनकम के साथ ही हमें लोगों की बीमा सुविधा के तहत सेवा करने का अवसर भी प्राप्त होता है। टुलिप एक ऐसी दुनिया है जहां सिर्फ खुशियॉ ही खुशियॉ है।
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भागीरथ सिंह राजपूत
भागीरथ सिंह राजपूत सुप्यार कंवर वीं. राजपूत सफर: सैल्समेन शिक्षा: कक्षा 10 पास पता: नंदूरबार (महाराष्ट्र) आई.डी. नं.: 153701, 178823, 156087 मैने (वनेसिंह जोगसिंह) अपने जीवन की शुरूआत रिटेल कपड़े के शोरूम पर एक सैल्समेन के रूप की और यह काम मैने 5 साल तक किया। उसके बाद मैने स्वयं का काम करने की सोची और खुद के कपडे की रिटेल की और 20 साल तक दुकान चलाई। परन्तु दुकान से एक सीमित इनकम और रूटीन कार्य से मैं संतुष्ट नहीं हो पा रहा था। इसलिए इस दरमियां मैने कुछ एमएलएम कम्पनियां भी की। परन्तु यहां पर हाथी के दांत खाने के और दिखाने के आरे होते थे। इस बीच मेरे रिलेटिव ने टुलिप ग्लोबल का प्लान दिखाया। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर तहत सेवा करने का मौका भी हमे मिलता है और इनकम तो असिमित। ऐसे में मैने टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन कर लिया और अल्प समय में ही इसके बेहतरीन प्लान के बूते पर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मैने टुलिप बिजनेस में राजस्थान के बाद अन्य स्टेट में पहली बार डायमण्डशिप प्राप्त की है। वहीं हाल ही में मैने मेरे पुत्र भागीरथसिंह वनेसिंह राजपूत एवं मेरी पत्नि सप्यार कंवर वनेसिंह राजपूत के नाम पर लगी आईडी पर भी डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरी डाउन टीम से मेाहन लाल कुमावत व सीमा मोहनलाल कुमावत को भी डायमण्डशिप प्राप्त हो गई है।
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मोहनलाल कुमावत
मोहनलाल कुमावत सीमा मोहनलाल कुमावत सफर: सैल्समेन, वैल्डिग कार्य, बिल्डिंग कान्ट्रेक्टर शिक्षा: , आईडी: 178825, 178826 पता: जयहिन्द कॉलोनी, तालोदा रोड़ नन्दूबार (महाराष्ट्र) दोस्तों मेरे पिताजी का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं परन्तु वितरित परिस्थितियों के कारण यह सम्भव नही हो पाया। फिर मै रेडिमेड की दुकान में सैल्समेन का काम करने लगा। उसके बाद में भादवासी, जिला-सीकर (राज.) छोड़, नन्दूरबार (महाराष्ट्र) आकर बस गया। यहां पर मैने फेब्रिकेशन कार्यशाला (वेल्डिंग) का कार्य शुरू किया। इसके बाद ही बिल्डिंग कान्ट्रेक्टर का कार्य भी किया। बेहतर इनकम के लिए मैने एक अन्य एमएलएम कम्पनी में भी काम किया। परन्तु आशानुरूप सफलता नही मिली। इसके बाद श्री वनेसिंह जी के माध्यम से टुलिप बिजनेस से जुड़ा और आज डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ। मैने महाराष्ट्र के द्वितीय डायमंड का खिताब प्राप्त किया है। हाल ही में मैंने आपनी पत्नि सीमा मोहनलाल कुमावत के नाम की आइडी पर भी डायमण्डशिप प्राप्त कर कपल डायमंड बन गये है।
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घमलादेवी
घमलादेवी बजरंग चैधरी सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: कक्षा 5, आईडी: 23468 पता: मु.पो. सरना, वाया-नसरीराबाद, जिला अजमेर (राज.) मैं एक मध्यवर्गीय परिवर की साधारण गृहिणी थी। मेरे पति की एक सीमित आय से हम एक साधारण सा जीवन व्यतीत कर रहे थे। इस दरमियां मुझे टुलिप बिजनेस की जानकारी मिली। खुली आंखे छोड़ करकभी सपनों में भी एक करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बनने की सोच तक नहीं आई। परन्तुत टुलिप की बदौलत आज मै डायमंड यानि एक करोडपति डिस्ट्रीबुटर के रूप में आपके सामने हूँ। मेरी इस सफलता में श्री विनोद सैनी, श्री अब्दुल समद, श्री मुकेश शर्मा एवं श्री हारून खान, श्री रामरतन मीणा, श्री विनोद शर्मा, श्री सलीम अंसारी, श्री दिनेश वरियानी व अन्य स्टार डाउन लाइन का विशेष सहयोग रहा। अब मेरे प्रयास रहेगा कि मेरी टीम के लोगों को भी अधिक से अधिक आर्थिक स्वतंत्रता मिले। उनके घरों में भी लक्ष्मी की बरसात हो, उनके सपने भी पूरे हो।
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नारायणी देवी
नारायणी देवी रघुनाथ सिंह राजपुरोहित सफर: डबल करोड़पति बीमा अभिकर्ता से शिक्षा: कक्षा 10, आईडी: 205144 पता: गांव-परालिया सांसण, पो. कोरना, वाया-कल्याणपुरा जिला बाड़मेर हमारा निजी आफिस रघुकुल 4-ए, गणपति नगर, सीएचबी 25 सैक्टर के पास, नहर वाली मैन रोड़ जोधपुर में है। आर्थिक सम्पन्नता तो मेरे घर में पहले से ही थी। क्यों कि मैं और मेरे पाति दोनों की बीमा अभिकर्ता है। मेरे पति का मानना है कि जो आनंद औरों को खिलाने में आता है वह स्वयं खाने में नहीं आता। ऐसा आनंद टुलिप में नजर आया। टुलिप रूपी इस चमकते हुए फूलों के गुलदस्ते के सिस्टम को गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में पहुंचाकर सुरक्षा एवं मानव सेवा करते हुए हजारों को करोड़पति बना सकता हूँ। इसके लिए मैं निदेशक श्रीमती एवं श्री पी.सी. जैन साहब का ह्नदय से आभारी हूँ। मेरे परिवार की 111 आईडी लगी हुई है। जिनमें से एक आईडी पर डायमण्डशिप हो गई है तथा अन्य कई आईडी अच्छी स्टेप की ओर अग्रसर है। हमारा सपना आर्थिक उन्नति के साथ अभावग्रस्त गौशालाओं को सहायता देते हुए गौवंश की रक्षा करना है।
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कैलाशचन्द सैन
कैलाशचन्द सैन सफर: खाद बीज की दुकान से शिक्षा: कक्षा 8 वीं पास पता: मु.पो. गोठियाना, अंराई (अजमेर) आई डी नं.: 22381 ‘‘टुलिप से पहले मैं खाद बीज की दुकान किया करता था। कड़ी मेहनत के बाद भी दुकान से करीब 8-9 हजार रूपए प्रतिमाह ही कमा पाता था। यह आमदनी मेरे परिवार के लिए कम पड़ती थी जिससे निराशा रहती थी। इधर हर साल अकाल की स्थिति होने से किसानों की खेतों से दूरी मेरी आमदनी से दूरी बनती गई। अकाल की मार से दुकान नहीं चल पर रही थी। ऐसे दौर में मार्केटिंग गुरू अब्दुल समद साहब व मुकेश जी शर्मा ने टुलिप प्लान के बारे में बताते हुए आर्थिक आजादी का रास्ता दिखाया। जिसकी बदौलत आज मैं डायमंड के रूप मे आपके सामने हूं। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम के लोगों को भी आर्थिक ताकत मिले। वे भी अपने सपनों को पूरा करें।‘‘
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अमित कुमार शर्मा
अमित कुमार शर्मा सफर: पढाई के बाद शिक्षा: बी.ए., आईडी: 18031 पता: मु.पो. आकोडिया, त. किशनगढ जिला: अजमेर (राज.) बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त करने बाद रोजगार की तलाष थी। इसी दौर में टुलिप बिजनेस के सम्पर्क में आया। मैने लक्ष्य के साथ टुलिप बिजनेस को सेवा के रूप में अपनाया। शुरू शुरू में तो कठिनाईयॉ आई। लेकिन जोश व लगन के साथ मैंने डगर नही छोड़ी, निरन्तर सफलता की ओर अग्रसर रहा। मैंने परिवार की 22 आईडी लगा रखी है। इसमें से मैंने एक आईडी पर स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरे भाई अनिलकुमार शर्मा भी अब शीघ्र ही डायमण्डशिप प्राप्त कर लेंगे। मैं अपनी डाउनलेग टीम को भी आर्थिक सम्पन्नता दिलाने के लिए निरन्तर प्रयन्तशील हूँ। मेरा प्रयास है कि मैं मेरी टीम के लोग ज्यादा से ज्यादा डायमण्डशिप प्राप्त करें।
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रूकसाना खान
रूकसाना खान हारून खान सफर: ब्यूटी पार्लर से, आईडी: 23467 शिक्षा: कक्षा 12 पता: हाजी मंजिल, मु.पो. रामसर जिला अजमेर (राज.) टुलिप से पूर्व मैं एक मध्यवर्गीय परिवार की एक साधारण गृहणी थी। इस आर्थिक युग में मैंने पैंसों की अहमियत करीब से देखी। मेरे पति की एक सीमित आय से हम एक साधारण सा जीवन व्यतीत कर रहे थे। ऐसे में मैंने परिवार की आर्थिक उन्नति के लिए ब्यूटी पार्लर खोला साथ ही एक निजी कम्पनी ने भी कार्य किया। इस दरमियां मुझे मेरे सहेली श्रीमती घमला देवी ने टुलिप का प्लान बताया तथा अपनी सफलता से भी अवगत कराया। इससे प्रभावित होकर मैने भी टुलिप बिजनेस ज्वॉइन कर लिया। सम्माननीय अप लाइन व स्टार डाउनलाइन के विषेष सहयोग से आज मैं डायमंड यानि करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में आपके सामने हूँ। मेरा मानना है कि जब आप किसी भी लक्ष्य को दिल से चाहते है तो सारी कायनात आपको उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है।
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रघुवीर राव
रघुवीर राव सफर: मार्बल व्यवसाय से शिक्षा: 8 वीं पास पता: महावीर काॅलोनी, सावंतसर, किशनगढ आईडी: 34874 टुलिप से पूर्व मैं किशनगढ इण्डस्ट्रीयल एरिया में मार्बल का गौदाम किया करता था। परन्तु इससे मैं इतने रूपये नहीं कमा पाता था। जिससे परिवार की हर आवष्यकता को पूरा कर सकूँ। मेरे निराषापूर्ण जीवन में उत्साह व जोष का दौर भरने का काम टुलिप ने किया। टुलिप में ज्वॉइनिग के बाद लगातार मेहनत के बाद मैने स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप का खिताब प्राप्त कर लिया है। टुलिप बिजनेस में शानदार इनकम के साथ ही साथ सुरक्षा व समाजसेवा का अवसर भी हमे मिलता है। मेरा प्रयास है कि मेरी टीम के लोंगो के घरों में भी आर्थिक स्वतंत्रता आये।
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रमेश कांटवा
रमेश कांटवा सफर: विद्यार्थी से शिक्षा: बी.ए. पता: हिरनोदा, त. फुलेरा, जयपुर (राज.) आईडी: 101389 आज के युग में ट्रेडिशनल बिजनेस एवं नौकरी से आम परिवारों को आर्थिक संबल मिलना बहुत कठिन है। इससे हम अपनी आप जरूरतों को भी पूरा नहीं कर सकते। ऐसे वक्त में मुझे एक सही राह की तलाश थी। मेरी यह तलाश पूरी हुई टुलिप से। जब टुलिप प्लान मेरे सामने आया तो मुझे लगा कि इसके द्वारा मैं आर्थिक आजादी, सुरक्षा, समाज सेवा, एवं मान सम्मान पा सकता हूँ। यही सोचकर मैने यह बिजनेस ज्वॉइन किया। इस बिजनेस मैने अल्प समय में स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली है। मेरा मानना है कि युवा वह शक्ति हैं जो देष की दिषा व दषा दोनों बदल सकती है। युवा अगर अपनी सारी शक्ति विचरों की, समय की, शरीर की और साधन की इसमें लगा दे तो दोस्तों वो दिन दूर नहीं जब हिन्दुस्तान से गरीबी नाम की कोई चीज शेष रह जाये।
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चिन्तामणी वर्मा
चिन्तामणी वर्मा-सारिका वर्मा सफर: इलेक्ट्रीशियन शिक्षा: बी.ए., आई.टी.आई. पता: शान्ति विहार कॉलोनी, डगानिया रायपुर (छत्तीसगढ़) आईडी: 643091, 643094 आईटीआई करने के बाद कैरियर की तलाश में था, मन में सपना बहुत था, इसी बीच एक नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी (प्रोडक्ट बेस) से परिचय हुआ। उसमें मैं सतत मेहनत करता गया, काफी समय व पैसा खर्च किया लेकिन दस वर्षो के बाद भी कामयाबी नजर नहीं आई नाम पैसा व ईज्जत तो खुद ने बहुत कमाया परन्तु ग्रुप के लोग उससे वंचित रहें। ग्रुप क लोगों को काफी संघर्ष करते देख मेरा मन विचलित हो गया। मन ही मन ऐसे अवसर की तलाश में था यहां पर यकीनी तौर पर समय और पैसे से आर्थिक आजादी पायी जा सके। तभी टुलिप का प्लान मेरे सामने आया। इस प्लान में आम लोगों की कामयाबी देखने के बाद मन में जुनून सवार हो गया और काम में लग गया। परिणामस्वरूप लगभग 13 माह में डायमण्डशिप हो गई। वहीं हाल ही में मेरी पत्नि सारिका वर्मा के नाम की आईडी पर भी डायमण्डशिप हो गई।
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बलजिंदरसिंह मान
बलजिंदरसिंह मान सफर: मैकेनिक लाईन से शिक्षा: 8 वी. पास पता: कॉलानी, इन्दौर (म.प्र.) आईडी: 270523 26 माह पूर्व एक प्रतिष्ठित जबलपुर मोटर्स कम्पनी में मात्र 2850 प्रतिमाह की सैलरी पर कार्य कर रहा था और मेरी जीवन शैली साधारण थी। जैसे ही मैरे पास मेरी अपलाइन अजयसिंह रघुवंशी के द्वारा टुलिप ग्लोबर प्रा. लि. का एक सुनियोजित बिजनेस का प्लान आया। मैने उसे देखते ही काम शुरू कर दिया और मात्र 26 माह में इस प्लान से चालीस लाख रूपये प्राप्त कर लिये है। आज मेरी जीवन शैली साधारण से असाधारण हो गई है। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि मैं सम्पूर्ण भारत में पंजाबी पहला डायमंड हूँ।
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रतन लाल वैष्णव
पवन वैष्णव (आईडी: रतनलाल वैष्णव, पिताजी) सफर:पढ़ाई करते हुए शिक्षा: बी. ए., आई डी: 22125 पता: बजरंग काॅलोनी, किशनगढ़ ‘‘मेरा शुरू से ही सपना रहा कि मेरे पिताजी श्री रतनलाल जी वैष्णव की तरह एक सफल व्यक्ति बनूं। हमारा मार्बल एवं प्रोपर्टी का निजी व्यवसाय होने के बावजूद कुछ अलग कर दिखाने का जज्बा था। सभी सत्यन वैष्णव (डायमंड) द्वारा यह टुलिप रूपी स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ। पढ़ाई करते हुए मैंने घर की 17 आई डी लगाकर इस बिजनेस को प्रारम्भ किया और अल्प समय में मेरे पिताजी के नाम से डायमंडशिप पूरी कर ली। साथ ही अन्य आई डी भी डायमंडशिप की ओर अग्रसर है। इस सफर में मेरे अपलाइन डायमंड एवं डाउनलाईन टीम का सराहनीय सहयोग रहा। मेरा लक्ष्य है कि जल्द ही डबल डायमंडशिप प्राप्त करते हुए मेरी डाउन लाइन टीम से अधिकाधिक डायमंड बनाउ। मेरा मानना है कि ‘‘बड़ी सोच रखने वाले को सफलता अवश्य प्राप्त होती है।‘‘
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सुमन सैनी
सुमन सैनी सफर: घरेलू कार्य से शिक्षा: बी.ए. पता: कचील किशनगढ आई.डी. नं.: 12632, 13953 “मैं किशनगढ के पस स्थित एक छोटे से गांव कुचील की रहने वाली हूँ। मैने बी.ए. तक शिक्षा ग्रहण की है। और उसके बाद घर का कार्य ही करती थी। मेरा परिवार आर्थिक रूप से असक्षम था। ऐसे समय में श्री हनुमानजी छणंग के द्वारा टुलिप प्लान मेरे सामने आया। उनकी कही बातों पर मैने विष्वास किया और टुलिप को ज्वाइन कर लिया। टुलिप से मिलने वाली बेहतरीन आय और बीमा सुरक्षा से मैं काफी प्रभावित हुई। फिर मैंने इस परियोजना से अन्प्य लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया। और धीरे-धीरे कारवा बढता गया। मैने अल्प समय में डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरी इस डायमण्डशिप में प्रथम डबल डायमंड श्री हनुमान छणंग का मुझे विशेष सहयोग मिला। मेर प्रयास है कि मेरी डाउनलेग टीम से भी ज्यादा से ज्यादा डायमंड बने इसके लिए मैं निरन्तर प्रयत्नशील हूँ। सच टुलिप ने मुझे सपनों से भी ज्यादा दिया है। टुलिप का प्लान एक आप व खास सभी लोगों के डिजाईन किया हुआ है। टीम के विशेष सहयोग के चलते मेरी डबल डायमण्डशिप भी हो गई है। यानि मैने करीब 1 करोड़ रूपये तो प्राप्त कर लिये है साथ ही पूर्व में 1 लाख की रोयल्टी तो मिल ही रही थी। अब रायल्टी डबल डायमण्डशिप पर 2 लाख रूपये हो जायेगी। साथ ही पेयर इनकम की आय वो अलग से है।
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राजेश सैन
राजेश सैन सफर: चित्रकारी हैण्डीक्राफ्ट व बीमा एजेन्ट से शिक्षा: कक्षा 11 पास पता: नगरपालिका के पास, सिलावटो की गली, किशनगढ, जिला-अजमेर (राज.) आईडी: 11518 टुलिप से पूर्व में चित्रकारी व हैण्डीक्राफ्ट का कार्य करता था। इसके साथ ही एक्स्ट्रा इनकम के लिए जीवन बीमा एजेन्ट का काम भी करता था। आर्थिक मजबूरी के लिए कई मार्केटिंग कम्पनियों में भी काम किया। किन्तु कुछ कम्पनियां अपनी गलत नीतियों के चलते बन्द हो गई तो कुछ कम्पनियों के प्लान के आम लोगों के पास पैसे नहीं आने से उनमें भी असफल ही रहा। ऐसे में मैने टुलिप बिजनेस को ज्वॉइन कर लिया और लगातार मेहनत लगन व विष्वास से इसमें काम किया। जिसका परिणाम रहा कि मैं आज आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ।
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सुशीला वैष्णव
दिनेश वैष्णव आईडी: सुशीला वैष्णव (पत्नि) सफर: टैक्सटाईल व मार्केटिंग शिक्षा: पता: स्वरूपगंज, भीलवाडा कैलाश नगर, चित्तौड़गढ आईडी: 36120 मैने अध्ययन के साथ साथ मार्केटिंग का अनुभव भी लिया। इस दरमियां कुछ मल्टीलेवन मार्केटिंग कम्पनियों से भी जुड़ा। परन्तु प्लानिंग वर्किग में अन्तर होने की वजह से असफलता हाथ लगी। जब टुलिप बिजनेस देखा तब मुझे इसकी प्लानिंग एवं वर्किग दोनो का एक स्पष्ट रूप दिखा। और मैंने टुलिप में ज्वाईनिंग के लिए हाँ कर दी। दोस्तों असफलता केवल एक ही मांग करती है कि सिस्टम के साथ लगातार प्रयास करों और वो मैने शुरू कर दिया। जिसका परिणाम है कि आज मैं अपनी पत्नि सुशीला वैष्णव की आईडी पर डायमंड लेवल प्राप्त कर चुका हूँ। मेरा मानना है कि भविष्य भूत पर विचार न करके व्यक्ति को केवल वर्तमान में जीना चाहिए।
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अर्जुन सिंह राठौड़
अर्जुन सिंह राठौड़ सफर: लाईट फिंटिंग व बीमा एजेन्ट शिक्षा: 10वीं पास, आईडी: 40724 पता: ठि. सालमपुरा, पो. धोईन्दा, जिला-राजसमंद(राज.) टुलिप से पूर्व में लाईट फिंटिंग का कार्य करता था। जिसमें मैं माह के लगभग 3-4 हजार रूपये महिने कमा लेता था। कुछ समय बाद मेरी शादी हो गई। परिवार की जिम्मेदारी और बढ गई। इसके बाद मैं साईड बिजनेस के रूप में बीम एजेन्ट का काम भी करने लग गया था। उसके पष्चात् भी मैं माह के 5-6 हजार रूपये ही कमा पाता था। ऐसे में भंवरसिंहजी राठौड़ व बंशीलाल जी मालाकार मेरे पास टुलिप का प्लान लेकर आये। प्लान तो अच्छा लगा। परन्तु ज्वॉइनिंग के पैसे भी नही थे। मैने 100 रूपये बंशीलाल जी को दिये बाकी पैसे उन्होने ही मिलाकर मेरी ज्वाइनिंग लगाईं। इसके बाद मेरे डाउन में दो ज्वाइनिंग लगाकर वे 500 रूपये का चेक मेरे पास लेकर आये। उसके बाद मैने काम शुरू किया और किष्तों में ज्वाइनिंग के पैसे लौटाए। मेरी इस डायमण्डशिप में भंवरसिंहजी, बंषीलालजी, व पप्पूसिंह जी का विषेष सहयोग रहा। साथही मेरी डाउन लेग टीम में अभयसिंह चैहान, गणपतसिंह राणावत, रोषनलाल चैधरी, नन्दलाल जी जाट, सौभाग्यसिंह जी राठौड़ एवं समस्त प्यारी प्यारी स्टार टीम का परस्पर सहयोग मिला।
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गोविंद राम शर्मा
गोविन्द राम शर्मा सफर: सिक्यूरिटी गार्ड शिक्षा: 10 वीं पास आई डी: 21827 पता: मु.पों. - बोराड़ा, तह. -कोटड़ी, जिला - भीलवाड़ा ए-103, सांगानेर कालोनी, भीलवाड़ा (राज.) ‘‘मैं एक साधारण से परिवार से संबंध रखता हूं। मैं भीलवाड़ा में प्रोसेस हाउस (फैक्ट्री) में बतौर सिक्यूरिटी गार्ड (गेटकीपर) की नौकरी किया करता था। यहाँ मेरी नौकरी मात्र 1500 रूपये मे लगी जो सालों तक काम करने के बाद 2006 तक लगभग 4000 तक पहुंची। कम आय होने के कारण मैं साइड मे स्क्रेप का काम भी किया करता था। परन्तु फिर भी मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर ही रही। वर्षों तक नौकरी करने के उपरान्त भी मेरे पास जो पुरानी साईकिल थी उसे बेचकर नई साईकिल लाने की हैसीयत नहीं थी। इस बीच श्री गोपाल पोरवाल एवं गुणवन्तजी सैन के माध्यम से टुलिप बिजनेस प्लान मेरे पास आया। मुझे प्लान अच्छा लगा और मैंने टुलिप बिजनेस ज्वाईन कर लिया। शुरूआती दौर में पार्ट टाईम व बाद मे फुल टाईम मैंने टुलिप बिजनेस किया। परिणामस्वरूप् आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप मे हूं।‘‘
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भैरूलाल पटवा
भैरूलाल पटवा सफर: बीमा एजेन्ट शिक्षा: बी.ए. पता: वृन्दावन कॉलानी, रामगंज मंडी, कोटा आई.डी. नं.: 101015, 101013 दोस्तों, टुलिप से पूर्व में मैं एक सामान्य सी जिंदगी जी रहा था। बतौर बीमा एजेन्ट के रूप में काम करते हुए 15 हजार रूपये प्रतिमाह कमा रहा था। कोई विशेष आर्थिक परेशानी बिलकुल नहीं थी। लेकिन पैसे वालों के पास शानदार गाड़ी, आलीशान बंगला और जबरदस्त बैंक बैलेन्स देखकर दिन मचल उठता था। में भी सोचता था कि काश मेरे पास भी ऐसा होता। मेरे भी सपने पूरे होते। परन्तु जो काम कर रहा था उससे यह यह संभव नहीं था। एक दिन विजय टी टाक साहब (डबल डायमंड) व एम.एल. नागर (डायमंड) साहब ने मेरे पास टुलिप बिजनेस प्लान लेकर आये। प्लान को ठीक तरह से समझ करव आष्वस्त होकर टुलिप बिजनेस मैंने शुरू किया। लगातार लगन व मेहनत से मैंने डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। वहीं हाल ही में मैंने डबल डायमण्डशिप भी प्राप्त कर ली हैं। यानि डबल करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बन गया हूँ। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम को लोगों के घरों में भी आर्थिक सक्षमता आये। उनके सपनों को भी टुलिप के माध्यम से धरातल मिले।
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नन्दाराम गुर्जर
नन्दाराम गुर्जर सफर: बीमा कार्य से शिक्षा: 10 वीं पास पता: मु. आदरवा, पो. मरवा, त. दूदू (जयपुर) आईडी: 62860 पढाई छोडने के बाद मैने पारिवारिक खेती-बाड़ी का काम शुरू कर दिया। लेकिन अकाल की स्थिति के चलते यह काम मुष्किल हो गया। उसके बाद मैने कुंआ खोदने की ठेकेदारी का काम शुरू किया। इस काम में काफी खतरों का सामना करना पड़ता था। फिर मैंने रियल स्टेट कम्पनी में भी काम किया। 4-5 साल काम करने के बाद भी आखिर में आशातीत सफलता हाथ नहीं लगी। इसी रियल स्टेट कम्पनी में काम करते हुए मेरी मुलाकात ओमप्रकाश जी कुमावत से हुई। जिन्होने मुझे टुलिप प्लान के बारे में जानकारी दी। जिसमें मैंने निरन्तर प्रयास, मेहनत व लगने काम करते हुए अल्प समय में डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरी इस सफलता के लिए मैं समस्त डाउनटीम का आभार प्रकट करता हूँ।
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सुप्यार कंवर वनेसिंह राजपूत
सुप्यार कंवर वी. राजपूत वनेसिंह जोगसिंह राजपूत भागीरथसिंह राजपूत सफर: सैल्समेन शिक्षा: कक्षा 10 पास पता: नन्दूरबार (महाराष्ट्र) आई डी नं.: 156087 ‘‘ मैंने (वनेसिहं जोगसिंह) अपने जीवन की शुरूआत रिटेल कपड़े के शोरूम पर एक सैल्समेन के रूप में की और यह काम मैनें 5 साल तक किया। उसके बाद मैंने स्वयं का काम करने की सोची और खुद के कपड़े की रिटेल दुकान की और 20 साल तक दुकान चलाई। परन्तु दुकान से एक सीमित इन्कम और रूटीन कार्य से मैं सन्तुष्ट नहीं हो पा रहा था। इसलिए इस दरमियां मैने कुछ एमएलएम कम्पनियां भी की। परन्तु यहां पर हाथी के दांत ओर और दिखाने के कुछ ओर ही होते थे। इसी बीच मेरे रिलेटिव ने टुलिप का प्लान दिखाया। प्लान पसंद आने पर मैनें टुलिप बिजनेस को ज्वाइन कर लिया और अल्प समय में ही इसके बेहतरीन प्लान के बूते पर डायमंडशिप प्राप्त कर ली। मैंने टुलिप बिजनेस में राजस्थान के बाद अन्य स्टेट में पहली डायमण्डशिप प्राप्त की है। वहीं हाल ही में मैनें मेरे पुत्र भागीरथ वनेसिंह राजपूत एवं मेरी पत्नी सुप्यार कंवर वनेसिंह राजपूत के नाम पर लगी आई डी पर भी डायमंडशिप प्राप्त कर ली हैं। मेरी डाउनटीम से भी कई डायमंड बने है।‘‘
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चन्दादेवी सैनी
नागर मल सैनी आईडी: चन्दादेवी सैनी सफर: टोल टेक्स नौकरी/खेती शिक्षा: एम.ए. पता: ग्राम मरवा, त. दूदू, जयपुर आईडी: 85878 एम.ए. करने के बाद एक अच्छे अवसर की तलाश थी। पहले खेती बाड़ी उसके बाद प्राईवेट स्कूल में नौकरी और अन्य दो तीन कामों में किस्मत आजमाई। लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दरमियां टुलिप बिजनेस का सामना ओमप्रकाष जी कुमावत, नन्दारामजी गुर्जर ओर मेरे मित्र गुमानसिंह जी के द्वारा हुआ। जिस दिन मैंने ज्वॉइनिंग उसी दिन 6-7 हजार की किशनगढ टोल टैक्स की नौकरी छोड़ दी और पूरी ताकत व लगन से मैने अल्प समय में ही डायमण्डशिप प्राप्त कर ली।
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अलिमुद्दिन कुरेशी
अलिमुद्दिन कुरेशी सफर: टायर पंचर व सप्लाई कार्य से शिक्षा: 5वी पास पता: हाईवे नं. 8, शाहपुरा (जयपुर) आईडी: 11296 टुलिप से पूर्व मे टायर-टयूब पंचर निकालने का काम करता था। जिसमें औसतन 8 हजार रूपये महिने कमा पाता था। इस दौरान मुझे विनोद जी सैनी, शिवकुमार जी त्यागी एवं कम्पनी डायरेक्टर महोदय श्री पी.सी. जैन साहब ने जयपुर के रामनिवास बाग में टुलिप बिजनेस का प्लान बताया। तब से मैने बिना रूके, निरन्तर रूप से कार्य करते हुए डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरी टीम में प्रमुख रूप से कमलेश शर्मा, रोहिताश कष्यप, मांगीलाल सैनी, रोशनलाल चैधरी, राजेश देवंदा, फुलबाबा, छीतरमल पलसानी, छोटे भाई शरीफ कुरैशी, मो. हफीज कुरैशी आदि शामिल है। डायमण्डशिप में मुझे मनोज जी सैनी का विशेष सहयोग मिला।
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मोहन लाल नागर
मोहन लाल नागर सफर: स्कूल संचालन व अभिकर्ता से शिक्षा: बी.ए. पता: खैराबाद, तह. रामगंज मण्डी, कोटा (राज.) आईडी: 51324 मैं प्राईवेट स्कूल का संचालन व एक निजी कम्पनी में अभिकर्ता के रूप में कार्य करते हुए आम जिन्दगी गजार रहा था। मैने करोड़पति होने का कभी सपने में भी नहीं सोचा था, लेकिन भगवान की ऐसी कृपा हुई कि श्री एस.एन. सोनी व श्री विजय टांक (डबल डायमंड, जयपुर) द्वारा टुलिप बिजनेस प्लान मेरी जिन्दगी में आया। निर्णय लेकर काम किया, लगातार कड़ी मेहनत करते हुए मुझे डाउन लाईन के रूप में मिले सितारों के रूप में बी.एल. पटवा (डबल डायमंड) ललित गुप्ता, मुन्ना लाल कुषवाह (डायमंड), बलराम साहू (डायमंड), रामस्वरूप कुमावत वसीम मोहम्मद, शैलेन्द्र मेहता, मुकेश शर्मा, दौलत जैन (पत्रकार) गिरिराज जोशी, पदमकुमार जैन, संकेत जैन, रईस मोहम्मद, मकसूद अहमद, राजाराम मेहरा, प्रहलाद सिंह नागर व समस्त डिस्ट्रीब्यूटर का ऐसा अतुलनीय सहयोग मिला जिसके चलते मैने 101 नं. पर डायमंड का खिताब प्राप्त किया। अब मेरी भगवान से यही प्रार्थना है कि मेरी डाउन लेग से अधिक से अधिक डायमंड बनकर अपना व अपने परिवार का नाम रोशन करे।
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प्रदीप सिंह राठौड़
प्रदीप सिंह राठौड़ श्रीमती रेणु कंवर सफर: मेडीकल स्टोर से शिक्षा: बी.ए. फाईनल पता: कृष्णा मेडीकल स्टोर किशनगढ आई.डी. नं.: 14955, 12166 कुष्णा मेडीकल स्टोर का संचालत करते हुए कुछ नया करने का जज्बा मन में पाले मुझे ऐसे अवसर की तलाश थी। जिसमें समाज में सम्मान बढे और आर्थिक रूप से सक्षमता आने के साथ ही नये लोगो से सम्पर्क भी बढे। इनका मिश्रण टुलिप मे नजर आया और साथ ही जनसेवा करने का मौका भी मिला। टुलिप में अब तक परिवार की 10 आईडी लगा रखी है। इनमें से मेरी पत्नि रेणु कंवर की आईडी में डायमण्डशिप हो चुकी है। इसके अलावा हाल ही में मेरे ना से लगी आईडी में भी डायमण्डशिप हो चुकी है। हांलाकि आर्थिक सम्पन्नता का इष्वरीय आशिर्वाद तो टुलिप से विभिन्न राज्यों, जिलों गांवों व ढाणियों में जो सम्पर्क का खजाना मिला वह अद्भुत है। हजारों लोगों से सम्पर्क के बीच डाउनलेग से मेरा परिवार का रिष्ता बना हुआ है। टीम में गरीब के घरों मे टुलिप ने जो खुशियां दी है उसे देखकर आत्मसंतुष्टि मिलती है।
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अनूप कुमार तिवारी
अनूप कुमार तिवारी सफर: प्राईवेट स्कूल से अध्यापक से शिक्षा: बी.ए. फाइनल पता: ग्राम लालपुरा (कुलगडी) जिला सतना (म.प्र.) आईडी: 333702 12 वीं पास करने के बाद मैने पांच सौ रूपये प्रति महिने के वेतन से प्राईवेट विद्यालय सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल अटरा से अपने जीवन की शुरूआत की। 3 वर्षो की मेहनत के बाद मेरी वेतन 1415 रू. प्रतिमाह तक हो गई। तथी मेरे मित्र सुनील कुमार जी पाण्डेय के द्वारा टुलिप की जानकारी दी गई। 26 जुलाई 2008 से मैंने काम शुरू किया और लोगों के सपने सच कराते कराते मेरा सपना कब सच हो गया पता ही नहीं चला। विन्ध्य क्षेत्र (महाकौषनप्रान्त) का मुझे पहला डायंमड बनने का गौरव मिला। दोस्तो मेरा संदेष है - जीतने की पहली शत है लड़ते रहो, डटे रहो।
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अशोक सिंह शेखावत
अशोक सिंह शेखावत सफर: नौकरी व ट्रक ड्राईविंग से शिक्षा: सीनियर पास पता: ढाणी कीतपुरा, गांव पाथरेडी, त. कोटपूतली (जयपुर) आईडी: 65650 मैंने आई टी आई करने के बाद करीब 5-7 साल ग्रेनाइट फैक्ट्रीयों में काम किया। उसके बाद लगभग 10 साल तक ट्रक ड्राईविंग की। ट्रक ड्राईविंग की नौकरी बड़ी रिस्की थी। इस दरमियां पप्पूसिंह जी राठौड़ (डायमंड) जो मेरे रिष्तेदार है ने टुलिप बिजनेस से जुड़ने के लिए कहा। रिष्तेदार होने के कारण उनके सम्मान स्वरूप मैंने टुलिप में ज्वाइनिंग तो कर ली। परन्तु प्लान विष्वास नहीं होने के कारण काम नहीं किया। फिर जब पप्पू सिंह राठौड़ डायमण्डशिप के नजदीक थे। तो उनको देखकर मे उनसे प्रेरित हुए नहीं रहा सका। जून 2008 को टुलिप मे मैने काम शुरू किया और आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ।
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भवानी सिंह राठौड़
भवानी सिंह राठौड़ सफर: टैक्टर वर्कशॉप से शिक्षा: कक्षा 12 पास पता: करणी कालोनी परबतसर (नागौर) आईडी: 247144 टुलिप से पहले मैने 7-8 सालों तक ट्रैक्टर वर्कशॉप मे काम किया। उसके बाद पूंज लॉयड मेगा हाईवे कम्पनी में बोलेरो गाड़ी पर ड्राइविंग की। इसके लिए मुझे 2500 रूपये की तनख्वाह मिलती थी। अप्रेल 2008 में विजय सिंह जी सिसोदिया व गोविन्दसिंह जी राठौड़ ने टुलिप का प्लान बताया। टलिप बिजनेस में बेहतरीन इनकम होने के कारण प्लान बताने के साथ ही ज्वॉइन हो गया और अल्प समय में ही मैने स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त कर ली। मेरा लक्ष्य है कि 2011 तक डायमंड से स्टेप 4 करूं। यानि एक्स में 9 डायमंड और वाई में 9 डायमंड।
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युगल किशोर प्रधान
युगल किशोर प्रधान सफर: नौकरी से आई डी: 699389 शिक्षा: बी.काम, सी.ए. (फाइनल), एम.बी.ए. पता: ग्राम हरदी, पो. गाताडीह, त. विलाईगढ़, जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़) डब्ल्यू -19, विवेकानन्द नगर, राजनांदगाव (छत्तीसगढ़) ‘‘27 वर्ष की उम्र तक पढ़ाई करने के बाद मैंने नौकरी मे अपना कैरियर प्रारम्भ किया। इस बीच मैंने टुलिप बिजनेस को अपनी रोजी-रोटी के लिए नहीं अपनाया, बल्कि इसे मैंने अपने सपने को पूरे करने के लिए किया। हमेशा अपने सपने को दिमाग में रखकर इस बिजनेस को किया। मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या समय की थी। क्योंकि मुझे नौकरी में रोज सुबह 10 बजे से लेकर रात 9 बजे तक काम करना पड़ता था। मैंने इस चैलेंज को अपने सपने को पूरा करने के लिए स्वीकार किया और सिर्फ संडे को पूरा समय इस बिजनेस में लगाया। मैंने अपने आप से वादा किया कि कुछ भी हो जाये इस बिजनेस में डायमंड बनकर रहूंगा। आज उस निर्णय की वजह से तथा सीनियरों के सहयोग से 13 माह 17 दिन में अपनी डायमंडशिप पूरी कर ली।‘‘
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मोहम्मद फरहान खाऩ
मोहम्मद फरहान खाऩ सफर: नौकरी से शिक्षा: बी.कॉम पता: 50/1, जूना रिसाला सुभाष मार्ग, इन्दौर(म.प्र.) आईडी: 500019 दोस्तों में टुलिप से पूर्व एक प्राईवेट कम्पनी में नौकरी करता था। जहां मुझे मझे 25000 प्रतिमाह की तनख्वहा मिलती थी। मेरे बडे भाई के मित्र श्री साजिद खान के द्वारा मुझे टुलिप में काम करने का सौभाग्य मिला, जहां मैने अपने सीनियर डायमंड अगफर नवाब बेग के नेतृत्व में और मेरी प्यारी स्टार डाउनलाइन में विकास गर्ग, अरीफ खान, जीवन मालवीय, शहिद खान, धमेन्द्र जाट, कृपाल मथानिया, और राकेष रघुवंशी व अन्य सभी लीडरों के परस्पर सहयोग की बदोलत मात्र 20 महिने 7 दिन में स्टेप 14 पूरी कर डायमण्डशिप यानि कराड़पति डिस्ट्रीब्यूटर का खिताब प्राप्त कर लिया। आज मै व मेरा पूरा परिवार कम्पनी डायरेक्टर श्री पी.सी.जैन साहब के आभारी है जिन्होने इतना प्यारा सिस्टम बनाया। जिसके तहत हम डाउन लाइन के लोगों को आर्थिक मजबूती दिलाते है तो हम स्वतः ही आर्थिक रूप से सक्षम बन जाते है।
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गिरधारी चन्द गुर्जर
गिरधारी चन्द गुर्जर सफर: चाय की दुकान से शिक्षा: साक्षर पता: सांवतसर मदनगंज किशनगढ (अजमेर) आईडी: 40387 मैं टुलिप से पहले चाय की दुकान चलाया करता था। फिर मैने मार्बल का काम भी किया। एक बार महावीर जी राव मेरे पास टुलिप बिजनेस लेकर आये। उनसे मेरा अच्छा परिचय व अपनापन होने कारण मैने उनको इस बिजनेस में ज्वॉइन होने के पैसे तो दे दिये। लेकिन मेरी भावना उसमें काम करने की नही थी। क्यों कि मुझे नहीं लगा कि जो इनकम इस बिजनेस में बताई गई है। वास्तव में मिलती है। परन्तु जब इस बिजनेस से लोगों को लाखों कमाते देखा तो मुझे लगा कि इस बिजनेस में दम हैं। उनके बाद मैं टुलिप बिजनेस को सक्रिय और गम्भीरता से करने में लग गया और आज के टीम के परस्पर सहयोग से डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ।
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सीमा मोहनलाल कुमावत
मोहनलाल कुमावत सीमा मोहनलाल कुमावत सफर: सैल्समेन, वैल्डिग कार्य, बिल्डिंग कान्ट्रेक्टर शिक्षा: , आईडी: 178825, 178826 पता: जयहिन्द कॉलोनी, तालोदा रोड़ नन्दूबार (महाराष्ट्र) दोस्तों मेरे पिताजी का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं परन्तु वितरित परिस्थितियों के कारण यह सम्भव नही हो पाया। फिर मै रेडिमेड की दुकान में सैल्समेन का काम करने लगा। उसके बाद में भादवासी, जिला-सीकर (राज.) छोड़, नन्दूरबार (महाराष्ट्र) आकर बस गया। यहां पर मैने फेब्रिकेशन कार्यशाला (वेल्डिंग) का कार्य शुरू किया। इसके बाद ही बिल्डिंग कान्ट्रेक्टर का कार्य भी किया। बेहतर इनकम के लिए मैने एक अन्य एमएलएम कम्पनी में भी काम किया। परन्तु आशानुरूप सफलता नही मिली। इसके बाद श्री वनेसिंह जी के माध्यम से टुलिप बिजनेस से जुड़ा और आज डायमंड के रूप में आपके सामने हूँ। मैने महाराष्ट्र के द्वितीय डायमंड का खिताब प्राप्त किया है। हाल ही में मैंने आपनी पत्नि सीमा मोहनलाल कुमावत के नाम की आइडी पर भी डायमण्डशिप प्राप्त कर कपल डायमंड बन गये है।
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Kodu Lal Kushwaha
 

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गिरीराज योगी
गिरीराज योगी सफर: ट्रेक्टर सेल्समेन से शिक्षा: 11वी. पास, आईडी: 208106 पता: ग्रा. डोलीपुरा, पो. मृगवास त. कुम्भराज, जिला गुना (म.प्र.) मैं सामान्य सी जिंदगी जीते हुए ट्रेक्टर सेल्समेन के रूप में काम करके दस हजार से पद्रह हजार रूपये प्रतिमाह कमा रहा था। सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक काम करने के बाद भी मेरे सपने मन के मन में दबे हुए थे। मेरा सपना था कि मैं दुनिया की सैर कर सकूँ व गरीब लोगों की मदद कर सकूँ। ऐसे में मेरे सामने टुलिप रूपी ट्रेन चलकर मेरी जिन्दगी में आई। मेरे दोस्त बलराम साहू से टुलिप योजना के बारे में मुझे विस्तार से जानकारी दी। इस प्लान में मुझे लोगों की सेवा के साथ व्यवसाय करेन का मौका मिला। मैं मेरी टीम का सहयोग करते हुए आगे बढता गया। जिसके फलस्वरूप मैं आज आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। सच, टुलिप इज द बेस्ट। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम में से अधिक से अधिक डायमंड बने।
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श्री राम साहू
SHRI RAM SAHU Ex-Profession - Computer Center (Printing Work) Education - B.Com Address - A.B. Road Beenaganj, Guna (MP) Id no. - 331689 Friends, God bless you.” Living a simple life. I was spending my life leisurely. But I wished and looked for a bright future so that I would be able to provide an aristocracy life to my family and would help the people. God is great, he made a path to come true my dream and sent Shri Balram Ji Sahu with tulip plan. I wished to do something different and this plan encouraged me. Now I had an opportunity to do some better for me and my family. By God grace I joined the plan and moved to help the people with a firm determination. The God is the only who sent me my well wishers and by the help of them I could win diamond ship. Now I pray to God that every member of my team will secure his diamond ship in a little time.
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डॉ. भगवानदास चौधरी
डॉ. भगवानदास चैधरी सफर: डॉक्टर से डायमंड शिक्षा: आयुर्वेदाचार्य से, आईडी: 256581 पता: म.न. 4884, पंचम सोसाइटी सेक्टर 68, मोहाली (पंजाब) महाराष्ट्र में प्रेक्टिस करते हुए मेरी मुलाकात वनेसिंहजी सर से हुई। मैने उनकों एक प्रोडक्ट बेस कम्पनी का प्लान दिया। तो उन्होने कहा कि मेरे पास भी एक प्लान है उसे सुन लीजिए। जैसे ही उन्होने टुलिप का प्लान मेरे सामने रखा मेरे दिल ने कहा यही है राईट चॉइस। और मै धीरे धीरे टुलिप के संग चलता रहा। जिसका परिणाम रहा कि अल्प समय में मेरी डायमण्डशिप हो गई। मैंने इसमें 35 आईडी लगा रखी है। मुझे विष्वास है कि दिसम्बर 11 तक कुछ और आइडी पर डायमंड हो जायेगी। मैं एक बात कहना चाहूगा कि ख्वाब बदलता है, मंजिल नहीं करवां बदलता है। दिल में हमेशा जज्बा रखो जीत का क्यों कि किस्मत चाहे बदले न बदले लेकिन वक्त जरूर बदलता है।
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अंजलि काले
अंजलि अजय काले सफर: गृहणी से शिक्षा: एस.कॉम, आईडी: 657980 पता: सी-22, लोकमान्य परिसर, गोल चैक, रोहणीपुर्म, रायपुर (छत्तीसगढ) वर्तमान की नेटवर्क कम्पनियों प्राडक्ट आधर प स्पये अर्निग कम्पनियां है परन्तु टुलिप कमपनी आम व्यक्ति को खास बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही साथ व्यक्ति को सुरक्षित, आर्थिक रूप से सम्पन्न व्यक्तित्व प्रदान कर रही है। टुलिप के जनक माननीय श्री पी.सी. जैन एव श्रीमती शशि जैन तथा हमारे समस्त लीडरों का धन्यवाद देता हूँ। जिसके सहायोग से मेरी डायमण्डशिप सम्भव हो सकी है। गरीब और असहाय रहकर गरीबों की अपनो की सेवा नही होती लेकिन धनवान बनकर सबकी सहायता की जा सकती है। जेा हमारे जीवन का उद्देष्य होना चाहिए। टुलिप व्यवसास क्यो करता है यह आपको तय करना है, कैसे करना है सीखने के लिए अपलाईन, ट्रेनिग, टूल्स एवं सपोर्ट सिस्टम पर छोड़ दीजिए। क्यों की सीखेंगे तो ही जीतेगे। मेडी डाउन टीम से युगल किशोर प्रधान व मो. बदरूद्दीन डायमण्डशिप प्राप्त कर चुके है। मेरे सफर मे श्री विनोद सैनी, दिनेश कुमावत, नवाब बेग, ललित मोहन साहू तथा चिंतामणी वर्मा का सहायोग अविस्मरणीय है। ’घुट घुट कर तो बहुत जी लिया, जीना है तो सर उठाकर जियो, वक्त का रोना छोड़ दो यारों, टुलिप ज्वॉइन करो स्वाभिमान से जीयो।
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माँगीलाल बिजारणियां
माँगीलाल बिजारणियां सफर: खाद बीज की दुकान से शिक्षा: सीनियर पता: सिहोट बड़ी, सीकर (राज.) आई डी: 133165 ‘‘दोस्तों, टुलिप बिजनेस से पूर्व में एक खाद बीज की दुकान किया करता था। लेकिन उससे मैं अपने सपने पूरे नहीं कर पाता था। क्योंकि मेरे सपने शुरू से ही बहुत बड़े थे। लेकिन इस दुकान से यह संभव नही था। इस दरमियां मे ओमपुरी जी गोस्वामी (कपल डायमंड) एवं गोपालपुरी जी गोस्वामी के द्वारा मेरे पास टुलिप बिजनेस प्लान आया। प्लान मुझे अच्छा लगा और मैंने ज्वाॅइन कर लियां मैं उनको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं और उनका शुक्रगुजार हूं कि आज टुलिप के जरिये मेरी लाइफ बदल गई। मैं मेरे सभी अपलाइन के साथ ही दोनों स्टार लाइन का भी हृदय से आभारी हूं जिसके परस्पर सहयोग से मेरी डायमंडशिप संभव हो पाई। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम से कम से कम 100 डायमंड बने।‘‘
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Vikas Garg
 
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Simanchal Padhi
 
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Gaurav Laharee
 
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मो. बदरूदीन
मो. बदरूदीन सफर: भूतपूर्व सैनिक (भारतीय थल सेना) शिक्षा: डी.ई. (इलेक्ट्रोनिक्स), ग्रेजुएट (सेना प्रमाणित) पता: सन्यासी नगर, खमतराई, रायपुर (छत्तीसगढ) आईडी: 742702 भारतीय थल सेना से सेवानिवृत होने के पष्चात कैरियर की तलाश में था। मन में सपना बहुत था और परिवार की जिम्मेदारी भी थी। मैने बीमा एजेन्ट का काम शुरू कर दिया और 9 वर्षो तक इसमें सतत मेहनत की। इस काम से मेरी रोजी-रोटी तेा पूरी हो रही थी। पर मेरे सपने पूरे नहीं हो रहे थे। मुझे आर्थिक जरूरतों पर हमेशा समझौता करना पड़ता था। ऐसे में टुलिप प्लान मेरे आया। इस प्लान में आम लोगों की कामयाबी देखने के बाद मन में जुनून सवार हो गया और काम में लग गया। जिसका परिणाम रहा कि मात्र 14 माह 25 दिन में डायमण्डशिप हासिल हो गई। मेरे इस प्रयास में अप लाइन युगल किशोर प्रधान एवं भागीरथ प्रधान का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम से अनेक डायमंड बने।
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Neelofar Parveen
 
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अगफर नवाब बेग
अगफर नवाब बेग सफर: प्राईवेट बैंक में लोन प्रतिनिधि शिक्षा: बी.ए. पता: 78, गीता नगर, इंदौर (म.प्र.) आई.डी. नं.: 328793, 443498 दोस्तों, मैं टुलिप से पूर्व एक प्रतिष्ठित प्राईवेट बैंक में बतौर डी.एस.ए. कार्य करता था। टुलिप बिजनेस के बारे में मुझे मेरे मित्र ने बताया मित्र के जबरदस्ती करने के कारण मैंने बला टालने के लिए ज्वाइनिंग राशि दे दी। फिर प्लान को ठीक तरह से समझकर 28 आईडी के साथ काम शुरू किया। वहीं शेयर बाजार में आई अचानक गिरावट से बैंक ने पर्सनल लोन देना बन्द कर दिया। लोन कार्य बंद होने के कारण फिर मैंने टुलिप बिजनेस को फुल टाईम के रूप में अपना लिया। जिसका परिणाम रहा कि मेरे टाइम तक सबसे कम समय में डायमंड बन सका। साथ ही हाल ही में मैने 121 वें डायमंड के साथ ही डबल डायमण्डशिप भी प्राप्त कर ली है।
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राम निवास सांखला
रामनिवास सांखला सफर: खेती बाड़ी व बिल्डिंग मेटेरियल सप्लाई से शिक्षा: 8 वीं फैल पता: आउट साईड सूरज पोल गेट, विजय नगर रोड़, ब्यावर आई डी: 40620 ‘‘दोस्तों, मैं टुलिप से जुड़ने से पहले खेती-बाड़ी व बिल्डिंग मेटेरियल का कार्य करता था। टुलिप की मीटिंग में जाने का मौका मिला तो मुझे विनोदजी सैनी ने प्लान बताया तथा टुलिप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया मैंने प्लान को समझकर टुलिप में ज्वाईंनंग ले ली परन्तु झिझक होने के कारण में 2-3 माह तक कार्य नही कर पाया। विनोदजी ने मुझे प्रोत्साहित कर मेरी झिझक को खत्म कर मुझे टुलिप का कार्य करने पर प्रोत्साहित किया। तब से लगातार में टुलिप का कार्य कर रहा हॅू तथा मैंने करीब 30 माह में डायमंडशिप प्राप्त कर ली। इसके अलावा मेरी अन्य 12 आई. डी. भी चल रही हैं जिसमें मेरे पुत्र की 10 वीं स्टेप व मेरी पत्नी की 8 वीं स्टेप तथा मेरी पुत्रियों व अन्य पुत्रों की भी आई. डी. 7 वीं स्टेप पर है। वास्तव मे टुलिप ज्वाईन कर जो पाया है वह कहीं और से मुझे प्राप्त नहीं हो सका।‘‘
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कल्पना महेश पाटिल
 
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मोहम्मद मुजाहिद
 
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गुड्डी बाई कुशवाह
 
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मथुरा देवी मीणा
 
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संग्रामसिंह राव
संग्रामसिंह राव सफर: मार्बल एजकटिंग ठेकेदार शिक्षा: 8वी. फेल आईडी: 292325 पता: मालियों की ढाणी किशनगढ पिपरई, रायसेन (म.प्र.) टुलिप से पूर्व में किशनगढ (अजमेर) मार्बल एरिया में थार मार्बल में एजकटिंग मशीन पर ठेकेदार था। इस कार्य में मैं प्रतिमाह 10 हजार कमा लेता था। श्री महावीर राव ने मुझे टुलिप के बारे में बता रखा था। परन्तु मैंने कभी उसे गंभीर रूप से नहीं लिया। एक बार महावीर जी का फोन आया कि दिलीप जी का डायमंड फंशन है अपने को वहां फंशन देखने चलना है। उन्होने कहा तो मैं उनके साथ चला गया। मैं जब वहां गया तो हजारों लोगों को कार्यक्रम में देख और सैकड़ों गाडियॉ देख मैं टुलिप से जबरदस्त प्रभावित हुआ। फिर मैने टुलिप को सुचारू रूप से करना शुरू कर दिया। आज मैं आपके सामने डायमंड के रूप में हूँ। मेरे इस प्रयास में महावीर जी राव, जे.पी. जागा (पिताजी), बलराम सिंह राव (भाई) कैलाशचन्द खिची, किशनराव, अशोक राव, शिवप्रकाश पूनिया, धीरज यादव, खुमान साहू, जग्गनाथ यादव, हनुमंत राव, मनोज अग्रवाल, भूपेन्द्र साहू, डॉ. चन्दनसिंह प्रजापति, रमेशचन्द प्रजापति, नारायण प्रजापति, मिश्रीलाल साहू, जयराम मामाजी आदि का विशेष सहयोग रहा।
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सारिका वर्मा
सारिका वर्मा सफर: इलेक्ट्रीशियन शिक्षा: बी.ए., आई.टी.आई. पता: शान्ति विहार कॉलोनी, डगानिया रायपुर (छत्तीसगढ़) आईडी: 643091, 643094 आईटीआई करने के बाद कैरियर की तलाश में था, मन में सपना बहुत था, इसी बीच एक नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी (प्रोडक्ट बेस) से परिचय हुआ। उसमें मैं सतत मेहनत करता गया, काफी समय व पैसा खर्च किया लेकिन दस वर्षो के बाद भी कामयाबी नजर नहीं आई नाम पैसा व ईज्जत तो खुद ने बहुत कमाया परन्तु ग्रुप के लोग उससे वंचित रहें। ग्रुप क लोगों को काफी संघर्ष करते देख मेरा मन विचलित हो गया। मन ही मन ऐसे अवसर की तलाश में था यहां पर यकीनी तौर पर समय और पैसे से आर्थिक आजादी पायी जा सके। तभी टुलिप का प्लान मेरे सामने आया। इस प्लान में आम लोगों की कामयाबी देखने के बाद मन में जुनून सवार हो गया और काम में लग गया। परिणामस्वरूप लगभग 13 माह में डायमण्डशिप हो गई। वहीं हाल ही में मेरी पत्नि सारिका वर्मा के नाम की आईडी पर भी डायमण्डशिप हो गई।
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जगदीश चंद्र कुमावत
 
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विजय टॉक
विजय टॉक सफर: प्राइवेट नौकरी से शिक्षा: कक्षा 12वीं पास पता: हीरापुरा, अजमेर रोड़ जयपुर आई.डी. नं.: 11006, 11208,11042 प्राईवेट कोचिंग पर नौकरी करते हुए 2500 से 3000/- प्रतिमाह कमा पाता था। जो कि वर्तमान दौर में ना के बराबर लगते थे। पढते समय बहुत बडे-बडे सपने देखे लेकिन हकीकत का धरातल कुछ और ही निकला। आर्थिक समस्या के कारण इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाया। बीच में कुछ नेटवर्क मार्केटिंग भी की, लेकिन हाथी के दांत खाने के ओर दिखाने के आरे वाली कहावत साबित हुई। इसी बीच परमपिता परमेष्वर ने श्री पी.सी.जैन साहब को टुलिप रूपी फूल देकर अवतरित किया और मुझे यह प्लान देखने को मौका मिला और निर्णय लेकर काम किया। लगातार व कड़ी मेहनत के चलते मैंने डाउनलाइन के रूप में मिले सितारों के रूप में राहुल जी खण्डेलवाल, एस.एन. सोनीजी, एम.एल.नागर, बी.एल. पटवा, एल.एल. कच्छावा, मन्नालालजी, धमेन्द्र टांक, कमलेश शर्मा, राजकुमार, मुकेश विजय, सत्यप्रकाश वर्मा, भगवान सहाय कुमावत, मो. वकील कादरी, भंवरलाल नाई, रमेशजी टांक, मनोज जी टांक, कुलदीपजी, उज्ज्वल सिंहजी व समस्त डिस्ट्रीब्यूटर्स का ऐसा अतुलनीय सहयोग मिला कि मैं एक साथ दो आईडी पर डायमण्डशिप हासिल करक डबल डायमंड का खिताब पाया। मेरी इस बिजनेस में 25 आईडी लगी हुई है जिसके लिए मैं प्रयासरत हूँ। मेरी परमपिता परमेष्वर से यही कामना है कि मेरी डाउनलेग का प्रत्येक सदस्य कम से कम समय में डायमंड बनकर ऐतिहासिक माहौल कायम करें।
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लक्ष्मण सिंह रावत
लक्ष्मण सिंह रावत सफर: वैल्डिंग वर्कस से शिक्षा: हायर सैकण्डरी पता: मदारपुरा, अजमेर (राज.) आई डी: 15593 ‘‘दोस्तों, टुलिप बिजनेस से पूर्व मैं अजमेर मे मदारपुरा, जे. पी. नगर कालोनी, टैम्पो स्टेण्ड के पास रावत वेल्डिंग वर्कस नाम से वर्कशाप चलाता था। जिससे घर का गुजर बसर तो हो रहा था किन्तु आर्थिक सक्षमता नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में टुलिप बिजनेस प्लान मेरे सामने आया। तब मैंने सोचा इससे करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बना जा सकता है तो इस मौके को गंवाना नही चाहिये। क्योंकि जो काम मैं कर रहा था वो तो कभी भी वापस कर सकता हू। मैंने टुलिप बिजनेस को ज्वाइन कर लिया। जब मेरी स्टेप 8 हो गई थी तब मैंने वर्कशाप को बंद कर दिया और फुल टाईम टुलिप बिजनेस में लग गया। इस बीच करई प्रकार की परेशानियां भी आई परन्तु हिम्मत नहीं हारी और निरन्तर प्रयास करता रहा। जिसका परिणाम रहा कि अल्प समय में ही मैंने टुलिप में डायमंडशिप प्राप्त कर करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बन गया।‘‘
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विजय अधर बोढरे
विजय अधर बोढरे सफर: बिजनेस (इन्वर्टर/बैट्री) शिक्षा: डी.आई.ई.ई., बी.ए. पता: अमलनेर (महाराष्ट्र) आई डी: 436183 ‘‘बचपन से मैन गरीबी मे पलते-बढते हुए मजदूरी, पेपर बांटना, बीमा एजेन्ट और कई सारे काम किए। सिर्फ सपने बड़े थे इसलिए इन्जीनियरिंग इन्टरनेशनल कम्पनी में परमानेन्ट जाब किया। मगर सपनों के नजदीक जाने की उम्मीद भी नजर नहीं आई तो जाब छोड़ दिया और ठान ली कि कभी नौकरी नहीं करूंगा। मुझे सिर्फ इस बात पर भरोसा था कि बड़ा आदमी बनने के लिए पैसों की नहीं सपनों की जरूरत होती है, और धन कमाने के लिए धन की जरूरत नहीं होती। फिर इन्वर्टर, बैट्री का बिजनेस किया, जिससे पुराना कर्जा चुकाया और खा-पीकर खुश था। फिर भी सपनों से दूर था। फिर एक एम.एल.एम. कम्पनीं मे चार साल दिन-रात मेहनत की, मिला कुछ नहीं और गवायां बहुत कुछ। इस बीच टुलिप का प्लान मेरे पास आया। प्लान मुझे अच्छा लगा। फिर मैंने सब कुछ देखने, जानने के बाद टुलिप में 12 महीनें पार्ट टाईम, 12 महीने फुल टाईम करके 24 महीनें मे डायमंडशिप प्राप्त कर ली। साथ ही जल्दी ही मेरी डबल डायमंडशिप भी होने वाली हैं।‘‘
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विष्णुप्रिया प्रधान
बी. आर. प्रधान (आई डी विष्णुप्रिया प्रधान - पत्नी) सफर: शिक्षक से शिक्षा: एम. ए. पता: ग्राम - तुरंगा, पो. - पड़िगाव (पुसौर), जिला - रायगढ़ (छ.ग.) आई डी - 699395 ‘‘मैंने अपना सफर छत्तीसगढ़ शासन में शिक्षक की नौकरी से शुरू किया। 18 वर्ष की पढाई तथा 18 वर्ष नौकरी करने के पश्चात जिन्दगी सिर्फ कट रही थी। हमेशा आर्थिक तंगी मे गुजरना पड़ता था। मैं हमेशा सोचा करता था यदि यही हाल रिटायरमेंट तक रहा तो जिन्दगी तो कट जाएगी मगर मैं एक बेहतर जिन्दगी नहीं जी पाउंगा। इसी बीच मुझे टुलिप बिजनेस की जानकारी मिली मैंने बिजनेस को करने का तुरन्त निर्णय लिया। जैंसे ही मैंने ‘‘ख्वाब बने हकीकत‘‘ पुस्तक में आम लोगों को डायमंड बनते देखा तो मुझे प्रेरणा मिली और मुझे ये आत्मविश्वास हो गया कि मैं डायमंड बन सकता हू। मैंने अपलाईन के मार्गदर्शन मे योजनाबद्ध तरीके से पूरी लगन व जिम्मेदारी के साथ मेहनत की, मैंने कोई बहाना नही बनाया परिणामस्वरूप मैंने अल्प समय में डायमंडशिप का खिताब प्राप्त कर लिया मेरे सफर में मुझे अपलाईन श्री चिन्तामणी वर्मा, अजय काले एवं युगल किशोर प्रधान का भरपूर सहयोग मिला। मुझे खुशी है कि आज मेरे टीम में मो. बदरूद्दीन व सी. पी. सिहं दो डायमंड बन चुके है। आज मैं अपनी जिन्दगी को अपने तरीके से जी रहा हॅू। अतः टुलिप बिजनेस को जिन्दगी बदलने वाली बिजनेस मानता हूं। जो एक आम इंसान को खास बनाता है।‘‘
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धर्मेंद्र जाट
धर्मेन्द्र जाट सफर: काल सेन्टर की नौकरी शिक्षा: बी.एस.सी. पता: ग्राम पोस्ट - ढाबला, तह. - नरसिंहगढ (राजगढ़) म.प्र. आई डी: 575529 ‘‘दोस्तों, टुलिप से पूर्व एक प्रतिष्ठित मोबाइल कम्पनी के कॉल सेन्टर मे पांच हजार महीने की नौकरी करता था। टुपिल के बारे में मुझे बेस्ट फ्रेन्ड डायमण्ड जीवन मालवीयजी ने बताया, फिर मैंने दिन-रात मेहनत व लगन से और मेरे सी. डायमंड नवाब बैग साहब, एम.एफ. खान, विकास गर्ग के नेतृत्व में और मेरे आने वाले डायमण्ड कृपालसिंह मथानिया, डा. सुरेन्द्र रामटेके, सुनील शर्मा, लोकेन्द्रसिंह राठौड़, नन्दकिशोर कुमावत, डा. धर्मेन्द्र रामटेके, विजयकुमार रामटेके, राजकुमार रामटेके व अन्य लीडरों के परस्पर सहयोग से 22 महीनें 13 दिन में 14 स्टेप पूरी कर डायमण्डशिप प्राप्त की यानि करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर का खिताब प्राप्त किया और मेरा पूरा परिवार डायरेक्टर साहब श्री पी. सी. जैन साहब का आभारी है जिन्होनें ऐसा अद्भुत प्लान बनाया। अब मेरा लक्ष्य मेरी डाउन लेग से 101 डायमण्ड बनाने का हैं।‘‘
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नरेंद्र कुमार साहू
 
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अल्ताफुर्र रहमान खान
अल्ताफुर्र रहमान खान सफर: मार्केटिंग मैनेजर फार्मा शिक्षा: बी. एस.सी. पता: बंगला नं. 23, ब्रुक बांड कालोनी, माणिक बाग रोड़, इन्दौर (म.प्र.) ‘‘दोस्तों, जिंदगी के उतार चढाव और रेलमपेल से उब गया था। नेटवर्किंग की तरफ वर्षो से रूझान रहा। देश विदेश की कई कम्पनियों में आजमाइश की। परन्तु सफलता कहीं नहीं मिली। सब जगह कथनी व करनी मे फर्क रहा। इस दरमियां एक दिन अगफर नवाब बेग साहब (ट्रिपल डायमंड) ने मुझे टुलिप ग्लोबल प्रा. लि. का बिजनेस प्लान बताया। मैंने तुरन्त हाँ कहकर प्लान ज्वाइन कर लिया। प्लान इतना अच्छा लगा कि डायमंड बनने की ठान ली। यह सपना मैंने खुली आंखों से देखा था जो मालिक के करम से पूरा हुआ है। इस सच्चे सपने को साकार करने में मेरी सहयोगी टीम का परस्पर सहयोग रहा। साथ ही मेरी अपलाइन टीम का भी मैं हमेशा आभारी रहूंगा।‘‘ ‘‘सबके लिए मेरा यह पैगाम आम हैं, टुलिप सफलता का दूसरा नाम है।‘‘
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अगफर नवाब बेग
AGFAR NAWAB BEGH Ex-Profession - Loan Representative In Private Bank Education - B.A. Address - 78, Geeta Nagar, Indore (MP) Friends, before my tulip joining I was working as a DSA in reputed private bank. Regarding tulip Business, I acquainted through my friend. On the pressure of my friend I gave him Rs. 3200 to ignore the problem. Later on after acquiring knowledge of plan I started the work on 28 I.Ds. At the same time bank stopped personal loan facilities due to occurrence of sudden downfall in share market. Due to stoppage of loan facilities I adopted tulip business as a full time job. Consequently, I could establish myself as a Diamond in shortest time of 18 months all over India till my diamond ship. Now I recently I have got Triple Diamond ship within 31 months that is the shortest period to get this honor in India.
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संतोष कुमार महन्ती
संतोष कुमार महन्ती सफर: शासकीय नौकरी (शिक्षक) शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट पता: मैन रोड़ दन्तेवाड़ा, पो. दन्तेवाड़ा जिला दन्तेवाड़ा (छत्तीसगढ़) आई डी: 723365 ‘‘पढ़ाई पूरी होने के बाद एक छोटी सी शासकीय नौकरी मिली। कम वेतन और अधिक जिम्मेदारियों की वजह से मैं अपने और अपने परिवार के सारे सपने पूरे नहीं कर पा रहा था। मैं बहुत परेशान था जिंदगी को काट रहा था। मैं जिंदगी को जीना चाहता था। ऐसे समय में माननीय श्री पी. सी. जैन साहब एवं श्रीमती शशि जैन द्वारा रचित टुलिप का महान प्लान मेरे पास आया। प्लान देखते ही मेरी अन्तरात्मा से आवाज आयी कि ईश्वर ने एक अवसर मुझे दिया है अमीर और कामयाब आदमी बनने का। फिर मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। युगल किशोर प्रधान जी के विशेष सहयोग से विपरित परिस्थितियों में भी मैंने काम किया और अल्प समय में ही डायमंडशिप प्राप्त कर ली। ‘‘रख दो चार ही कदम मगर जरा तबियत से कि मंजिल खुद ब खुद तेरे पास चली आयेगी। हालात से रोने वाले मत भूल टुलिप की डायमंडशिप से तेरी तकदीर बदल जायेगी।‘‘
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सुनील शिव नारायण जायसवाल
 
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सी पी. सिंह
सी. पी. सिंह सफर: प्राइवेट नौकरी से शिक्षा: दसवीं पास पता: ए /29, ओ.पी.एम., शहडोल (म.प्र.) आई डी : 793473 ‘‘कक्षा दसवीं उत्तीर्ण कर सन् 1971 में छोटी गांव गोदियां चमन वैशाली (बिहार) से रोजी रोटी की तलाश में म.प्र. के अमलाई पेपर मिल्स, शहडोल में सेल्समेन के रूप मे 90 रूपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की, 1979 में मजदूर के रूप में 240 मासिक वेतन प्राप्त करने के बाद वर्तमान 2010 में 10,000/- रूपये मिल रहे थे। टुलिप का प्लान सबसे पहले रायपुर (छत्तीसगढ) मे प्रधान जी, मो. बदरूद्दीनजी से देखने को मिला। जयपुर जाकर आफिस में जैन साहब से मुलाकात की तो लगा कि हमारे दादाजी पुनः अवतरित हो गये है। टुलिप में ईमानदारी एवं सच्ची लगन का पैसा है। अतः अपने समय का सदुपयोग टुलिप प्लान में करना चाहिए। विशेष सहयोग के रूप मे मारूतिनन्दन दक्षिणमुखी विराजिति वरगवौ ग्राम के पवनपुत्र हनुमान जी के साक्षात् दूत के रूप् में कोटिया से आर.के.सिंह, मों.वारिस भाई, भोपाल से देवेन्द्र पाटील, बिहार से राजकिशोरजी तथा रांची से मों. सहाबुद्दीन जी एवं समस्त टीम के हौंसले व अनुशासन के साथ 15 माह एवं 17 दिन मे इस डायमंड रूपी यात्रा का समापन हुआ। वहीं अब मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम से अधिक से अधिक लोग डायमंडशिप तक की मंजिल प्राप्त करें। उनके घरों मे भी लक्ष्मी की बरसात हो।‘‘
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Gopal Jangid
 
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रितेश काकिर्डे
रितेश काकिर्डे सफर: प्राईवेट बैंक लोन प्रतिनिधि (डीएसए) शिक्षा: इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग डिप्लोमा पता : 18/1, मोती तबेला, उर्दू स्कूल के पीछे, इन्दौर (म.प्र.) आई डी : 699593 ‘‘दोस्तों, वन्दे मातरम्! टुलिप से पूर्व में एक प्रतिष्ठित प्राईवेट बैंक मे लोन डी.एस.ए. के रूप में कार्य करता था। मैंने जीवन मे कई व्यवसाय किये, जिसमें लाखों रूपयों का टर्न ओवर होने पर भी मासिक आमदनी सेंसेक्स की तरह कभी कम कभी ज्यादा थी। मेरा मानना है कि “Failure are pillar of success” इसी तर्ज पर मैं हर कार्य मे असफल होने के बाद भी सफल होने के लिये नये कार्य मे जुट जाता था। टुलिप का प्लान जब मैनें देखा तो पाया कि अगर 4 वर्ष मे भी इस कार्य को पूर्ण कर लेता हूं तो सरकारी नौकरी की तुलना में जीवन के कई वर्ष बचा लूंगा एवं रिटायरमेन्ट की राशि 29 लाख रूपये होगी एवं पेंशन 3 लाख रूपये तक मासिक होगी या व्यवसाय की तुलना करू तो करोड़ों की लागत के बाद भी यह संभव नहीं हो पाता है। यह वास्तविकता जब समझा तो फार्म पर तीन साइन किये एवं इस कार्य को 18 माह 21 दिन में पूर्ण किया। मुझें प्लान बताकर टुलिप मे लाने वाले मेरे मित्र अ. नवाब बेग (ट्रिपल डायमंड) एवं डाउनलाइन लाइन का सहयोग रहा, वह अविस्मरणीय है और जो प्यार और सम्मान मिला वों शब्दों मे बयान नही कर सकता। मेरे इस सफर में मेरी पत्नी और परिवार वालों का अतुलनीय योगदान रहा है।‘‘
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जीवन मालवीय
 
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राम बाबू साहू
रामबाबू साहू (राजू साहू) सफर: एक सफल बिजनेसमैन शिक्षा : 12 वीं पास पता: साहू आटो पार्टस, मैन रोड़, लटेरी, जिला - विदिशा (म.प्र.) आई डी : 455206 ‘‘दोस्तों, नमस्कार, टुलिप से पूर्व मैं एक प्रतिष्ठित आटो पार्टस व्यवसायी था, टुलिप बिजनेस का प्लान मेरे अपने श्रीरामजी साहू (डायमंड) ने मुझे दिखाया मुझे प्लान शानदार लगा। मैनें यह सोचकर प्लान ज्वाईन किया कि मैं डायमंड बनूं या ना बनूं आपको जरूर डायमंड बना दूंगा। दोस्तों हकीकत तो यह है कि टुलिप प्लान की पावर से वे तो डायमण्ड बने है और मैनें भी मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल संभाग से प्रथम डायमंडशिप का गौरव प्राप्त किया इस सफर में मुझे श्री भगवानसिंह राजपूत, शेख युसूफ खान, ओमप्रकाश साहू, ब्रजेष तोमार, अमरचन्द खरे, संतोष वघेल, धर्मेन्द्र गुर्जर, शिशुपाल यादव, डा. विधान वैद्य, शेषकरण राजावत, हमीर विश्वकर्मा, शमीम एहमद, घासीराम वंशकार, कमरलाल मेहतर, रामदयाल साहू, सौलंकीजी, साहूजी, ओमप्रकाश शर्मा एवं समस्त स्टार टीम का विशेष सहयोग एवं अपलाईन विजय टांक (ट्रिपल डायमंड) व समस्त सीनियर डायमण्ड का मार्गदर्शन मिला।‘‘
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भगोती देवी
भगोती देवी पत्नी प्रहलाद सिंह सफर: प्रगतिशील किसान से शिक्षा: बी.ए., बी.एड. पता: मु. पो. श्यामपुरा, धोद (सीकर) आई डी नं.: 154243 ‘‘मैने बी. ए. पास करने के बाद बी. एड. किया। आजीविका के लिए मैं सीकर जिले मे आर्गेनिक खेती व फूलों की खेती तथा डेयरी मे प्रगतिशील किसान के रूप मे कार्यरत था। उस समय शर्मा दूध डेयरी के संचालक संजयजी शर्मा ने मुझे टुलिप के प्लान के बारे मे बताया टुलिप बिजनेस के बारे मे विस्तार से जानने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी इस बिजनेस को ज्चाइन करना चाहिए। उसी समय मैनें टुलिप बिजनेस में दो आई डी लगा दी। जिसमें से मैंने एक आई डी पर डायमंडशिप प्राप्त कर ली है तथा हाल ही में दूसरी आई डी जो कि मेरी धर्मपत्नी भगोती देवी के नाम से है उसमें भी मैंने डायमंडशिप प्राप्त कर ली है। यानि हम कपल डायमंड बन गये है। मैं अपनी इस सफलता के लिए पूरा श्रेय कर्मठ लगनशील प्यारी-प्यारी डाउन लाइन को देता हू।‘‘
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सोहन लाल मेघवंशी
सोहन लाल मेघवंशी सफर: सिविल ठेकेदारी से शिक्षा: कक्षा 6 पास पता: ग्राम - रूपपुरा, पोस्ट- बान्दनवाड़ा (अजमेर) राज. आई डी: 40498 ‘‘दोस्तों, टुलिप बिजनेस ज्वाईन करने से पूर्व मैं एक साधारण सी जिंदगी जीते हुए सिविल ठेकेदारी का काम करता था। इस कार्य से मुझे प्रतिमाह 4 से 5 हजार रूपये की आय हो पाती थी। इस इनकम से परिवार का गुजर बसर भी ठीक प्रकार से नहीं हो पाता था। परिवार पर हमेशा आर्थिक तंगी की तलवार लटकी रहती थी। इसी बीच मुझे वीरेन्द्रसिंह जी रावत एवं डायमंड सत्यनजी वैष्णव के मार्गदर्शन मे वरदान रूपी टुलिप बिजनेस की जानकारी मिली। इसके प्रभावशाली प्लान से मैं प्रभावित हुआ तथा मैंने एक साथ 13 आई डी लगाकर टुलिप बिजनेस ज्वाइन किया तथा शुरूआती 11 दिनों मे ही 6 स्टेप पूरी कर ली। मुझे मेरी मेहनत का फल मिला एवं कुछ सालों की मेहनत में ही मैंने डायमंडशिप प्राप्त कर ली। मेरी इस डायमण्डशिप में मो. आमीन बिहारी एवं दिनेशजी जादोन (जूनियर डायमण्ड) का एवं मेरी पत्नी श्रीमती कानी देवी का विशेष सहयोग मिला। अब मेरा परिवार आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुका है। अब मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम के लीडर्स भी जल्द से जल्द डायमंडशिप प्राप्त करे। उनके घरों में वे खुशियां आये जिनकी चाहत उन्होनें की है। सच, टुलिप इज द बेस्ट कम्पनी।‘‘
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पन्ना देवी नवल
पन्नादेवी गौतम नवल सफर: साधारण गृहणी से पता: बिचला बास, भदवासिया, जोधपुर (राज.) आई डी: 37278 ‘‘मैं साधारण गृहणी हू। मेरा परिवार ईश्वर की कृपा से बहुत सौभाग्यशाली है। टुलिप बिजनेस जब हमारे सामने आया और उसे लेकर मानवतावादी सोच के हमारे अपलाइन श्री कोमलसिंह उज्जवल (पूर्व सरपंच माणकलाव, जोधपुर) एवं टुलिप के प्रथम कपल डायमंड श्री दिलीपसिंह राजपुरोहित ने हमें अवगत करवाया। तब हमारे परिवार में विद्यमान सेवा के संस्कार को आधार मिल गया। मेरे पति एवं मैंने चिंतन मनन किया तथा हमारे परिवार पर भगवान की कृपा से जोधपुर जैसे महानगर में सर्वप्रथम कार्य प्रारम्भ किया। यद्यपि समस्याएं आती रहीं हमारे अधूरे मानव जीवन को पूर्ण मानवीय जीवन बनने के प्रयासों से लोगों की मदद करने की शुरूआत से ईश्वर रास्ता देता गया। टुलिप बिजनेस में आने वाले तमाम लोग भी डायमंड बनें ऐसी हम हार्दिक भावनाएं रखते हैं। हमारी प्यारी-प्यारी टीम के अथक प्रयासों से हमें ये उपलब्धि प्राप्त हुई, जिस पर हमें गर्व है। आप भी कोशिश करें रास्ता सफलता का है, हिम्मते मरदा, मददे खुदा। टुलिप डायरेक्टर एवं तमाम सीनियर लीडर्स का आजीवन आभार व्यक्त करतें है जिनके मार्गदर्शन से हमें यह उपलब्धि प्राप्त हुई।‘‘
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सीमा सुरेंद्र वर्मा
सीमा सुरेन्द्र वर्मा सफर: शिक्षक से, आई डी: 643123 शिक्षा: एम.एस.सी., बी.एड. पता: ग्राम पोस्ट - हसदा (बेरला) दुर्ग (छ.ग.) वर्तमान पता: रोहिणीपुरम, रायपुर (छत्तीसगढ़) ‘‘दोस्तों, टुलिप से पहले मैनें 15 साल शिक्षाकर्मी की नौकरी की। उसी दौरान चिन्तामणीजी वर्मा द्वारा टुलिप का परिचय हुआ। शिक्षाकर्मी रहकर मैं कभी अपने सपनें पूरे नहीं कर पाता। इसलिए सन्डे टू सन्डे समय निकालकर टुलिप अपनाया क्योंकि टुलिप में मुझे अपना भविष्य उज्ज्वल दिखने लगा। मुझे एक अच्छे मौके की तलाश थी और वह मौका मुझे टुलिप के रूप में मिला। जो जरूरी है, उसे शुरू करना चाहिए। जो मुमकिन है उसे करें और आप पायेंगे कि नामुमकिन काम भीआप कर पायेंगे। केवल तेज और मजबूत लोग ही नहीं जीतते बल्कि अंत मे जीतता वहीं है जिसे पता है कि वह जीतेगा। मेरे लिए जीवन की सबसे बड़ी सफलता यह है कि मेरे द्वारा हजारों लोगों का जीवन आसान बना और उन्हें अपने जीवन में कुछ करने का मौका मिला। इस सार्थक काम के लिए मौका देकर जिन्दगी ने मुझे बहुत बड़ा ईनाम दिया यह सब अपलाइन एवं डाउनलाइन के माध्यम से संभव हुआ। दूसरों की मदद किए बिना, हम अपनी मदद नहीं कर सकते।‘‘
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टीकम सिंह राणावत
टीकम सिंह राणावत सफर: प्राइवेट नौकरी से शिक्षा: कक्षा 12वीं फैल पता: मु.पो. - खरवा, तह. मसूदा जिला- अजमेर (राज.) आई डी: 105656 ‘‘दोस्तों नमस्कार, मैं टुलिप से पूर्व प्राइवेट नौकरी किया करता था। इस दरमियां मेरे सामने टुलिप बिजनेस का प्रस्ताव आया। टुलिप के बारे मे जितना बताउंगा उतना ही कम होगा। क्योंकि आज मेरे जैसे 12 वीं फैल व्यक्ति जिसने कभी सपने में भी नही सोचा था कि मैं करोड़पति बनूंगा। उस को हकीकत में बदला है टुलिप ने। दोस्तों, टुलिप के द्वारा पैसे के साथ मुझे जो जीवन साथी मिला है वह भी टुलिप की देन है। क्योंकि मेरे ससुरजी टुलिप के डायमंड है। मेरा मैसेज हर उस नवयुवक को है जो बेरोजगार है। काम धन्धे की तलाश में है टुलिप से बढिया बिजनेस दुनिया में दूसरा नही है और मुझको डायमंड तक लेकर जाने मे बंशीलाल मालाकार, भंवरसिंह राठौड़, कपल डायमंड पप्पूसिंह राठौड़ और जस्ट अपलाइन अमरचन्द गुर्जर एवं समस्त डाउनटीम का भरपूर सहयोग रहा है। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम के लीडर्स भी आर्थिक आजादी के इस मुकाम पर पहुंचे।‘‘
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महिपाल सिंह
 
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सुमन शर्मा
 
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पवन कुमार सोनी
पवन सोनी सफर: होटल व्यवसाय शिक्षा: 12वीं पास पता: निचला बाजार, ए.बी. रोड़, बीनागंज, तह. - चांचैड़ा, जिला - गुना (म.प्र.) आई डी: 349963 दोस्तों नमस्कार! होटल व्यवसाय करते हुए जीवन की उचाईयों को पाना चाहता था। लेकिन समय था 24 घण्टे का और होटल भी खुलता था 24 घण्टे यानि ईश्वर ने मुझे जो समय दिया पूरा समय होटल मे देता था जहां सपने क्या मेरा जीवन पूरा होते दिखता था। पर कहते है ‘जहा चाह होती है वहां राह होती है‘ और यह कहावत चरितार्थ हुई जब मेरे मित्र श्रीराम साहू (डायमंड) टुलिप प्लान को लेकर मेरे सामने आए। दोस्तों, प्लान को देखा और अपनी मंजिल का अहसास मुझे हुआ और मैंने प्लान ज्वाइन कर लगन के साथ काम किया और 28 माह में डायमंडशिप प्राप्त कर ली। अक्सर लीडर सफलता नहीं मिलने पर अपने सीनियर या कम्पनी को कोसते है। लेकिन मेरी 16 माह में स्टेप 6 हुई थी पर मैंने हिम्मत नहीं हारी और काम करता गया और डायमंडशिप प्राप्त कर ली। इस सफर में मुझे बहुत प्रतिभाएं मिली जो डायमंडशिप की और है उनमे मेरे मित्र दिलीपसिंह राजपूत, युवराजसिंह राजपूत, सुनील शर्मा, श्री विमलजी भार्गव, गजराजसिंह जी मीणा, दयाराम घोषी, मुरलीधर खण्डेलवाल, रिषी भार्गव एवं समस्त लीडर जिनका भरपूर सहयोग मिला। ईश्वर से कामना है कि मेरी टीम का प्रत्येक सदस्य जल्दी से जल्दी डायमंडशिप प्राप्त करें। टुलिप ने जहां मुझे आर्थिक आजादी दी वहीं विदेश जाने का मौका भी मुझे मिला जो जीवन का शानदार अनुभव रहा।‘‘ ‘‘परिन्दों को मंजिल मिलेगी यकीनन यह फैले हुए उनके पर बोलते है। वो लोग रहते है खामोश अक्सर जमानें में जिनके हुनर बोलते है।
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गोपाल लाल मीणा
 
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शंकर लाल
शंकर लाल देवासी सफर: किराणा दुकान से शिक्षा: कक्षा 4 पता: मु.-गोविन्दपुर, तह.- आहोर, जिला - जालोर (राज.) आई डी: 141861 मात्र कक्षा चार तक शिक्षा लेने के बाद रोजगार रूप मे मैंनें किराणा व्यवसाय को चुना। दुकान से उधार ज्यादा जाने के कारण एवं मुनाफा खर्च में चले जाने से रोज कुंआ खोदो और रोज पानी निकालो जैसी हालत थी। बचत जैसी तो कोई बात ही नहीं थी। मार्केटिंग कम्पनी मे भी किस्मत आजमाई लेकिन वहां बातें मीठी अनुभव कड़वा रहा। मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलने से निराशा मिली। टुलिप प्लान सामने आने पर ज्वाइनिंग तो कर ली लेकिन प्लान पर विश्वास नहीं हुआ। कहते है दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है। यही मेरे साथ हुआ। 6 माह बाद डायमंड उत्सव सेमिनार देखा तो विश्वास आया और उत्साह जगा। फिर लगातार मेहनत करते हुए अल्प समय म टुलिप में डायमंडशिप प्राप्त कर ली। वर्तमान में टुलिप में लगी अन्य आई डी से भी मुझे आर्थिक आजादी मिल रही है। इसके साथ मेरी पत्नि तिजो देवी देवासी की आई डी पर स्टेप 12 पूरी हो चुकी है। अब हम जल्द ही कपल डायमंड बन जायेंगे। इसके साथ ही मेरी टीम से भी अब डायमंड की कतार बनने वाली है। मुझे मेरी टीम पर नाज हैं।
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Sugana Devi
 
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घमला देवी
घमला देवी पत्नि बजरंग चौधरी सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: कक्षा 5 वीं पता: मु. पो. सराना, वाया-नसीराबाद, जिला -अजमेर (राजस्थान) आई डी नं.: 22385 ‘‘मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की साधारण गृहणी थी। मेरे पति की एक सीमित आय से हम एक साधारण सा जीवन व्यतीत कर रहे थे। इस दरमियां मुझे टुलिप बिजनेस की जानकारी मिली। खुली आंखे छोड़ कर कभी सपनों मे भी एक करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर बनने की सोच तक नही आई। परन्तु टुलिप की बदौलत आज मैं डायमंड यानि एक करोड़पति डिस्ट्रीब्यूटर के रूप मे मैं आपके सामने हू। मेरी इस सफलता मे श्री विनोद सैनी, श्री अब्दुल समद, श्री मुकेश शर्मा एवं श्री हारून खान, श्री रामरतन मीणा, श्री विनोद शर्मा, श्री सलीम अंसारी, श्री दिनेश वरियानीव अन्य स्टार डाउन लाइन आदि का विशेष सहयोग रहा। अब मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी टीम के लोगों को भी अधिक से अधिक आर्थिक स्वतंत्रता मिले। अभी हाल ही में मेरी डबल डायमंडशिप हो गई हैं।‘‘
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राज कुमार सिंह शेखावत
राजकुमार सिंह शेखावत सफर: फैक्ट्री में बतौर श्रमिक शिक्षा: 9वीं पास पता: ढ़ाणी कीतपुरा, गाव -पाथरेड़ी, तह. -कोटपुतली (जयपुर) आई डी: 65653 टुलिप से पूर्व मैं ग्रेनाइट फैक्ट्री में बतौर श्रमिक कार्य करता था। कड़ी मेहनत व मजदूरी के बाद होने वाली आय पर्याप्त नहीं थी। उसके बाद मैनें बेहरोड़ में परचूनी की दुकान की। परन्तु परचूनी की दुकान से भी इन्कम अच्छी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में कपल डायमंड पप्पूसिंह जी राठौड़ व भ्राता अशोकसिंह जी शेखावत, धीरसिंह शेखावत के माध्यम से मैंने टुलिप बिजनेस मे ज्वाईनिंग ली। परन्तु शुरूआती दौर में तो मैंने काम नही किया। फिर जब मेरे भाई की स्टेप 11 हो गई तो मैनें काम करना शुरू किया और 19 माह के अल्प वर्किंग टाइम मे मैनें 14 स्टेप यानि डायमंडशिप प्राप्त कर ली। मेरी पत्नी निर्मला कंवर की आई. डी. भी निरन्तर प्रोगे्रस पर हैं। मेरी इस सफलता में मेरी स्टार टीम में नरेन्द्रसिंह राठौड़, गजेन्द्रसिंह शेखावत, गुमानसिंह चैहान, रामचन्द्र चैधरी, घनश्यामसिंह राजपूत, बलवीरसिंह शेखावत, रविन्द्रसिंह शेखावत, जवाहरसिंह चैहान, रतनसिंह जांगिड़, जोरसिंह शेखावत का परस्पर सहयोग रहा। मेरा प्रयास रहेगा कि मेरे टीम लीडर्स के घरों में भी लक्ष्मी की बरसात हो, उनके सपने भी साकार हो। सच, टुलिप एक बहुत ही शानदार बिजनेस हैं।
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नंदा राम प्रजापत
नन्दाराम प्रजापत सफर: मार्बल गंगसा हैड आपरेटर से शिक्षा: कक्षा 8वीं पास पता: ग्राम-आदरवा, पोस्ट-मरवा, तह.-दूदू, जिला-जयपुर (राज.) आई डी: 36887 दोस्तों, टुलिप से पूर्व में मार्बल एरिया में गेंगसा मशीन में हैल्पर, आपरेटर और इसके बाद हैड आपरेटर के पद पर काम किया। 12 साल काम करने के बाद मेरी तनख्वाह 16000/- रूपये मासिक हो गाई। एक बार मेरे पारिवारिक सदस्य के बीमार होने से उसे इलाज के लिए किशनगढ़ के वाई. एन. अस्पताल में भर्ती कराया। इसी दरमियां अस्पताल के पास स्थित डेयरी बूथ पर दूध की थैली लेने गया। जहां पर डेयरी संचालक दिनेशजी कुमावत ने बातों ही बातों मे मुझे टुलिप बिजनेस ज्वाॅइन करने के लिए कहा। टुलिप बिजनेस के बारे में पहले मुझे मुकेश जी शर्मा ने भी बताया था। मगर उस वक्त मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब दिनेशजी ने मुझे प्लान बताया तब तक मुकेशजी की स्टेप 11 पूरी हो गई। इसलिए मैनें भी दिनेशजी से टुलिप बिजनेस ज्वाइन कर लिया और लगातार मेहनत व लगन के साथ काम करके मैंने डायमंडशिप प्राप्त कर ली। मेरी स्टार टीम में अनिलसिंह, बलजीन्दरसिंह मान, अगफर नवाब बेग, राकेश वर्मा, गोपाल प्रजापत, कल्याणसहाय प्रजापत, रामलाल प्रजापत, मूलचन्द प्रजापत, सूरजमल प्रजापत, नेमीचन्द कुमावत, देवेन्द्र तिवाड़ी आदि प्रमुख रूप से शामिल है।
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अशोक राव
 
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भंवर कंवर शक्तावत
भंवर कंवर शक्तावत पत्नि हनुमानसिंह राठौड़ सफर: साधारण गृहणी से शिक्षा: कक्षा 8वीं पास पता: ठि. भराई, तह. केकड़ी, अजमेर (राज.) कल्याण कालोनी, केकड़ी आई डी: 150875 ‘‘टुलिप से पहले में एक साधारण गृहणी थी। मेरे पति सरकारी सेवा में कृषि पर्यवेक्षक पद पर कार्यरत है। हमेशा धार्मिक सेवा एवं गौ सेवा में रूची रहती थी। परन्तु सरकारी सेवा से इस महंगाई के दौर मे पूरी नहीं होती थी। सरकारी नौकरी आगे भी नहीं बढने देती एवं भूखे भी नहीं मरने देती। इस बीच देवेन्द्रजी पारीक एवं शरीफ साहब टुलिप प्लान लेकर आये। पहले तो हमने मना कर दिया। परन्तु बाद मे सोचा कि अगर आर्थिक स्वतंत्रता पानी है तो इससे बढकर कोई बिजनेस नहीं है। 45 महीने पहले हमने इसमें ज्वाइनिंग की परन्तु सच्चाई, ईमानदारी, न्याय एवं सदाचार अपनाते हुए 17-18 महीने कार्य करते हुए करोड़पति बन गये। हमारी दूसरी आई डी की भी स्टेप 11 पूर्ण होने में है। इस कार्य में डायमंड देवेन्द्रजी पारीक एवं डाउनलाइन टीम का भरपूर सहयोग मिला।‘‘
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सुन्दर मेघवाल
 
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सोहन लाल
 
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रेखा
 
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दिनेश कुमार चौधरी
 
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Vijayadhar Patil Bodhare
 
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Murlidhar Kushwaha
 
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Ravindra Singh Rathore
 
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Gouri Saha
 
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Surendra Ramteke
 
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Prabhakar Patil
 
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Ved Prakash Singh Chouhan
 
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Yogita Bhupendra Patil
 
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Rameshwar Lal Jat
 
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Virendra Patil
 
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Usha Sharma
 
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Krishan Gopal Sharma
 
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Sanjay Kumar Kushwaha
 
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Oma Ram Bisnoi
 
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Sushil Kanwar
 
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Vikas Das
 
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Kanta Ujala
 
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Dharma Ram
 
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Bajarang Lal
 
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Shahnaz Parween
 
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Champa Devi
 
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Kaushilya Sahu
 
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Norat Ram
 
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Santosh Kumar Mahanty
 
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Prem Ruchandani
 
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Ashutosh Mishra
 
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Jagdish Baldevraj Bhagat
 
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Sattar Mohd
 
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Sudha Bagri
 
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Satish Kumar Kushwaha
 
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Guddi Choudhary
 
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Prabha Devi Verma
 
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